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Almora News: विश्व पर्यावरण दिवस पर चौखुटिया में होगी हिमालय आपातकाल बैठक
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चौखुटिया (अल्मोड़ा)। मध्य हिमालय क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे पर्यावरणीय संकट को लेकर सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने चिंता जताई है। वनाग्नि, जल संकट और जैव विविधता के नुकसान जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर आगामी पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर चौखुटिया में हिमालय आपातकाल बैठक आयोजित की जाएगी।
आयोजकों की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि उत्तराखंड सहित पूरे मध्य हिमालय क्षेत्र में पर्यावरणीय हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। जंगलों में बढ़ती आग से वन संपदा, जल स्रोत और वन्यजीवों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। आग की घटनाओं से कई क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगे हैं और मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि जंगलों से उठने वाला धुआं और कार्बन उत्सर्जन हिमालयी ग्लेशियरों और पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह संकट और गंभीर रूप ले सकता है। बैठक का उद्देश्य वनाग्नि, जल संकट, पर्यावरणीय असंतुलन और जैव विविधता संरक्षण जैसे विषयों पर समाज और सरकार के बीच गंभीर संवाद स्थापित करना है। साथ ही सामुदायिक भागीदारी के जरिए समाधान तलाशने पर भी चर्चा की जाएगी। आयोजकों ने युवाओं, छात्रों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और आम नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की है।
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आयोजकों की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि उत्तराखंड सहित पूरे मध्य हिमालय क्षेत्र में पर्यावरणीय हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। जंगलों में बढ़ती आग से वन संपदा, जल स्रोत और वन्यजीवों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। आग की घटनाओं से कई क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगे हैं और मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि जंगलों से उठने वाला धुआं और कार्बन उत्सर्जन हिमालयी ग्लेशियरों और पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
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यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह संकट और गंभीर रूप ले सकता है। बैठक का उद्देश्य वनाग्नि, जल संकट, पर्यावरणीय असंतुलन और जैव विविधता संरक्षण जैसे विषयों पर समाज और सरकार के बीच गंभीर संवाद स्थापित करना है। साथ ही सामुदायिक भागीदारी के जरिए समाधान तलाशने पर भी चर्चा की जाएगी। आयोजकों ने युवाओं, छात्रों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और आम नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की है।
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