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जीबी पंत संस्थान के शोध पर्यावरण संतुलन बनाने में मददगार : अजय टम्टा

Sun, 10 Sep 2023 11:48 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Sun, 10 Sep 2023 11:48 PM IST
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Helpful for the research environment of GB Pant Institute
जीबी पंत संस्थान के वा​र्षिक सम्मेलन में मौजूद सांसद अजय टम्टा और अन्य। संवाद 
अल्मोड़ा। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान का वार्षिक सम्मेलन धूमधाम से मनाया गया। सांसद अजय टम्टा ने कार्यक्रमों का शुभारंभ करते संस्थान के प्रयासों को सराहा। कहा कि आज पर्यावरण असंतुलन विश्व की गंभीर समस्या बन चुकी है। संस्थान पर्यावरणीय क्षेत्र में लगातार काम कर रहा है, जिसके शोध पर्यावरण संतुलन बनाने में मददगार साबित हो रहे हैं।
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रविवार को हुए कार्यक्रम में सांसद अजय टम्टा ने संस्थान में स्थापित पंडित गोविंद बल्लभ पंत की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। उन्होंने कहा कि संस्थान पंडित पंत की जन्मस्थली के पास स्थापित है। आज यह संस्थान अपने शोध और विकास कार्यों से पूरे विश्व में क्रांति फैला रहा है।
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संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील नौटियाल ने कहा कि जीबी पंत संस्थान आज भारत के इसरो की तर्ज पर कार्य कर रहा है। जहां इसरो चंद्रमा पर पहुंचने का अभियान अभियान चला रहा है। उसी तरह यह संस्थान भी पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है। यहां के वैज्ञानिक अपनी जी तोड़ मेहनत से संस्थान को आगे ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान हिमालय क्षेत्र में पर्यावरण, जैव विविधता और वनों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है।
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इस मौके पर संयुक्त सचिव अरविंद नौटियाल, डॉ. इला पंत, डॉ. शेखर घिमिरे, प्रो. एसपी सिंह, डॉ. आरके मैखुरी, डॉ. जेसी कुनियाल, डॉ. हरीसिंह गौर, डॉ. आईडी भट्ट, ई. किरीट कुमार, पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, डॉ. वसुधा पंत, कैलाश शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश बहुगुणा, पीसी तिवारी आदि मौजूद रहे।

वनों का कटान मानव जीवन के लिए बड़ा खतरा
अल्मोड़ा। प्रो. सुनील नौटियाल ने कहा कि जंगल का मानव जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है। लेकिन आज जंगलों का अंधाधुंध कटान हो रहा है जो भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। कहा कि जंगलों का खत्म या कम होना पर्यावरण असंतुलन का बड़ा कारण है। ऐसे में वनों के कटान को रोककर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की जरूरत है। नहीं तो भविष्य में सभी को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि सड़कों के निर्माण के लिए पेड़ों के कटान के पक्ष में संस्थान नहीं है। इसके लिए वैकल्पिक उपाय तलाशने होंगे।

पर्यावरण के अनुकूल ढलेंगे क्लाइमेट स्मार्ट विलेज
अल्मोड़ा। प्रो. सुनील नौटियाल ने कहा कि उत्तराखंड के साथ ही अन्य हिमालयी राज्यों में क्लाइमेट स्मार्ट विलेज बनाने की योजना संचालित की गई है। पहली बार हिमालयी क्षेत्रों में इस तरह के गांव विकसित किए जाएंगे। जीबी पंत संस्थान इन गांवों में अनियमित जलवायु परिवर्तन, पारंपरिक कृषि को छोड़ने के साथ ही सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के कारणों का पता लगाएगा और इन्हें जलवायु अनुकूलन गांव के रूप में विकसित करेगा।

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हिमालयी राज्यों में 40 से 50 प्रतिशत घटा स्रोतों का पानी
अल्मोड़ा। प्रो. सुनील नौटियाल ने बताया कि हिमालयी राज्यों में प्राकृतिक जलस्रोतों का जलस्तर 40 से 50 प्रतिशत तक घट गया है जो चिंता का विषय है। संस्थान फिर से इन जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए चाल-खाल बनाने के साथ ही स्रोतों के आसपास जंगल विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। 12 हिमालयी राज्यों में विलुप्त के कगार पर पहुंच चुके नौले-धारों और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों का सर्वे किया गया है, जिन्हें पुनर्जीवित करने का काम होगा।
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