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Almora News: आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था की सेहत खराब
Fri, 23 Feb 2024 11:50 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Fri, 23 Feb 2024 11:50 PM IST
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जिला आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारी । संवाद
अल्मोड़ा। आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था की सेहत खराब है। आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था की बेहतरी के दावे तो किए गए लेकिन धरातल पर स्थिति बेहतर नहीं हुई है। आलम यह है कि जिले में 23 आयुर्वेदिक अस्पतालों के पास अपनी छत नहीं है। ये अस्पताल किराये की इमारतों में चल रहे हैं।
जिले में 50 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। उत्तराखंड बनने के 23 साल बाद भी 23 अस्पतालों के भवन निर्माण के लिए भूमि तक चिह्नित नहीं हो सकी है। इन अस्पतालों का संचालन किराये की इमारतों में किया जा रहा है। जिला मुख्यालय में भी विभाग के पास अपना भवन नहीं है। नगर में आयुर्वेदिक अस्पताल लोअर माल रोड खोल्टा में किराये के भवन में संचालित हो रहा है। विभाग को इन अस्पतालों के भवन निर्माण के लिए अब तक जमीन नहीं मिली है। अस्पताल के संचालन के लिए बार-बार किराये के भवन बदलने पड़ते हैं। कई बार मरीजों को नए जगह अस्पताल संचालन की जानकारी नहीं होती है। इससे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीण इलाकों में किराये के भवन आसानी से नहीं मिलती
अल्मोड़ा। कई अस्पताल भवनों की छत जर्जर है। बारिश में छत से पानी टपकता है जिससे दवा समेत कार्यालय में रखे गए दस्तावेजों के खराब होने की आशंका रहती है। ग्रामीण इलाकों में किराये के भवन भी आसानी से नहीं मिलते हैं। इससे विभाग को काफी दिक्कतें होती हैं।
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इन अस्पतालों के पास नहीं है अपनी छत
राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल अल्मोड़ा नगर, अगासपुर, सैंणमानुर, मेरगांव, दोड़म, डीनापानी, काकड़ीघाट, सौनी, हऊली, मनुली, तोली, जिंगोली, बानठौक, बकस्वाड़, झिपुलचौड़ा, जीनापानी, नगचूलाखाल, देवलीखेत, तलागताल, स्यूनाकोट, भगौती, मनान, सल्पड़।
अस्पताल भवनों के लिए जमीन की तलाश जारी है। जैसे ही भूमि चयनित होगी, उसका प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा
-डॉ. निवेदिता जोशी, जिला आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारी अल्मोड़ा।
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जिले में 50 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। उत्तराखंड बनने के 23 साल बाद भी 23 अस्पतालों के भवन निर्माण के लिए भूमि तक चिह्नित नहीं हो सकी है। इन अस्पतालों का संचालन किराये की इमारतों में किया जा रहा है। जिला मुख्यालय में भी विभाग के पास अपना भवन नहीं है। नगर में आयुर्वेदिक अस्पताल लोअर माल रोड खोल्टा में किराये के भवन में संचालित हो रहा है। विभाग को इन अस्पतालों के भवन निर्माण के लिए अब तक जमीन नहीं मिली है। अस्पताल के संचालन के लिए बार-बार किराये के भवन बदलने पड़ते हैं। कई बार मरीजों को नए जगह अस्पताल संचालन की जानकारी नहीं होती है। इससे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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ग्रामीण इलाकों में किराये के भवन आसानी से नहीं मिलती
अल्मोड़ा। कई अस्पताल भवनों की छत जर्जर है। बारिश में छत से पानी टपकता है जिससे दवा समेत कार्यालय में रखे गए दस्तावेजों के खराब होने की आशंका रहती है। ग्रामीण इलाकों में किराये के भवन भी आसानी से नहीं मिलते हैं। इससे विभाग को काफी दिक्कतें होती हैं।
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इन अस्पतालों के पास नहीं है अपनी छत
राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल अल्मोड़ा नगर, अगासपुर, सैंणमानुर, मेरगांव, दोड़म, डीनापानी, काकड़ीघाट, सौनी, हऊली, मनुली, तोली, जिंगोली, बानठौक, बकस्वाड़, झिपुलचौड़ा, जीनापानी, नगचूलाखाल, देवलीखेत, तलागताल, स्यूनाकोट, भगौती, मनान, सल्पड़।
अस्पताल भवनों के लिए जमीन की तलाश जारी है। जैसे ही भूमि चयनित होगी, उसका प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा
-डॉ. निवेदिता जोशी, जिला आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारी अल्मोड़ा।