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अपने गांव को बहुत कुछ दिया पर पलायन से नहीं बचा पाए

Tue, 09 Apr 2019 11:29 PM IST
almora Published by: दीपक नेगी Updated Tue, 09 Apr 2019 11:29 PM IST
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Give village a lot but can not escape migration
मोहनरी गांव में पलायन के कारण बंद पड़ा एक घर। - फोटो : amar ujala

 भतरौंजखान से चार किमी की दूरी पर स्थित पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के गांव की तस्वीर भी पहाड़ के अन्य गांवों जैसी ही है। उनका गांव भी पलायन का दंश झेल रहा है। जंगली जानवरों के आतंक से खेती बंजर हो रही है। 

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 पूर्व मुख्यमंत्री और नैनीताल लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत अपने गांव मोहनरी साल में तीन-चार बार आते हैं। मुख्यमंत्री रहने के दौरान भी वह साल में दो-तीन बार गांव आए।  गांव के लोगों का कहना है कि हरीश रावत ने गांव में आसपास विकास कार्य कराए हैं जिसका लाभ स्थानीय लोगों को मिल रहा है।
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पलायन के चलते गांव के 15 घरों में ताले लटके हैं जबकि अधिकतर घरों के युवा रोजगार के लिए शहरों में रहते हैं। गांव से कुछ दूरी पर भतरौंज खान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है लेकिन यहां खास सुविधाएं नहीं हैं। गांव में पेयजल की स्थिति ठीक है।
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मोहनरी निवासी पूरन सिंह रावत बताते हैं कि हरीश रावत ने गांव में विद्युत पावर हाउस का निर्माण करवाया जिससे अब वोल्टेज की समस्या नहीं रहती। गांव के जीवन सिंह रावत का कहना है कि मुख्यमंत्री रहते रावत ने रीची से मोहनरी गांव तक एक और मोटर मार्ग बनवाया है। गांव में बने तटबंध में पानी एकत्र रहता है। गांव में एक प्राथमिक और एक जूनियर हाईस्कूल विद्यालय भी है जिसमें पर्याप्त स्टाफ भी है। प्राथमिक विद्यालय में मात्र चार बच्चे पढ़ रहे हैं जबकि विद्यालय में दो शिक्षक कार्यरत हैं। जूनियर हाईस्कूल में चार शिक्षक कार्यरत हैं लेकिन बच्चे सिर्फ 11 हैं। 
 

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