{"_id":"5d5e8fbc8ebc3e6ca42f484c","slug":"girda-remembered-on-yhe-drath-annersary-almora-news-hld353740369","type":"story","status":"publish","title_hn":"इतुक नि लगा उदेख घुनन मुनई न टेक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इतुक नि लगा उदेख घुनन मुनई न टेक
विज्ञापन
पुण्य तिथि पर जनकवि गिरीश तिवारी गिर्दा को श्रद्धांजलि अर्पित करते विभिन्न संगठनों के लोग।
- फोटो : ALMORA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा। जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ को नौवीं पुण्यतिथि पर याद किया गया। स्वागत की छत पर आयोजित कार्यक्रम में गिर्दा के लिखे और गाये गए। इस मौके पर झोड़े और गीत गाकर गिर्दा को श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम की शुरुआत हिमाला तुमनकैं धत्यूछों, जागो जागो ओ मेरा लाल... गीत गाकर हुई। इसके बाद इतुक नि लगा उदेख घुनन मुनई न टेक, जैंता एक दिन त आलो उ दिन य दुणी मैं गीत गाये गए। इस दौरान पूरन बोरा की छोलिया टीम ने शानदार प्रस्तुति दी। डॉ. कपिलेश भोज ने कहा कि गिर्दा के जीवन से समाज को प्रेरणा लेनी होगी। उनका जीवन समाज के लिए काम करने वाले लोगों के लिए प्रेरणादायी है।
वरिष्ठ पत्रकार पीसी तिवारी ने कहा कि गिर्दा हमेशा जन आंदोलनों में सक्रिय रहे। उत्तराखंड में घूम-घूम कर लोक गीतों के माध्यम से आंदोलन को धार दी। संचालन करते हुए वरिष्ठ रंगकर्मी नवीन बिष्ट ने कहा कि गिर्दा ने पहाड़ में चले जल, जंगल जमीन, राज्य आंदोलन समेत सभी जनांदोलन में हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई। अध्यक्षता करते हुए रेवती बिष्ट ने गिर्दा को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
विज्ञापन
समापन अवसर पर सावनी सांझ आकाश खुला है ओ हो रे सांझ निराली झोड़ा गाया गया। कार्यक्रम में शीला पंत, विमला बोरा, राधा बंगारी, नर्मदा तिवारी, मुन्नी पाटनी, शंभू राणा, लोक गायक कृष्ण मोहन सिंह बिष्ट ‘नन्दा’, गोपाल चम्याल, हयात रावत आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
कार्यक्रम की शुरुआत हिमाला तुमनकैं धत्यूछों, जागो जागो ओ मेरा लाल... गीत गाकर हुई। इसके बाद इतुक नि लगा उदेख घुनन मुनई न टेक, जैंता एक दिन त आलो उ दिन य दुणी मैं गीत गाये गए। इस दौरान पूरन बोरा की छोलिया टीम ने शानदार प्रस्तुति दी। डॉ. कपिलेश भोज ने कहा कि गिर्दा के जीवन से समाज को प्रेरणा लेनी होगी। उनका जीवन समाज के लिए काम करने वाले लोगों के लिए प्रेरणादायी है।
विज्ञापन
वरिष्ठ पत्रकार पीसी तिवारी ने कहा कि गिर्दा हमेशा जन आंदोलनों में सक्रिय रहे। उत्तराखंड में घूम-घूम कर लोक गीतों के माध्यम से आंदोलन को धार दी। संचालन करते हुए वरिष्ठ रंगकर्मी नवीन बिष्ट ने कहा कि गिर्दा ने पहाड़ में चले जल, जंगल जमीन, राज्य आंदोलन समेत सभी जनांदोलन में हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई। अध्यक्षता करते हुए रेवती बिष्ट ने गिर्दा को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
विज्ञापन
समापन अवसर पर सावनी सांझ आकाश खुला है ओ हो रे सांझ निराली झोड़ा गाया गया। कार्यक्रम में शीला पंत, विमला बोरा, राधा बंगारी, नर्मदा तिवारी, मुन्नी पाटनी, शंभू राणा, लोक गायक कृष्ण मोहन सिंह बिष्ट ‘नन्दा’, गोपाल चम्याल, हयात रावत आदि मौजूद थे।