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माओवाद के लिए एमपी और पश्चिम बंगाल से आता है बजट
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माओवादी भास्कर पांडे।
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। माओवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए संगठन के बड़े नेताओं को जीवन यापन के लिए मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल से धन मुहैया कराया जाता है। हालांकि यह रकम बहुत अधिक नहीं होती है। पर इससे उन्हें स्थान परिवर्तन में सहायता मिलती है। कुछ जरूरतें भी इससे पूरी कर लेते हैं।
माओवादी एक स्थान पर बहुत कम ही रुकते हैं और लगातार स्थान परिवर्तन करते रहते हैं। जीवन यापन से लेकर स्थान परिवर्तन तक के लिए राशि की जरूरत होती है, जिसकी पूर्ति माओवाद का गढ़ माने जाने वाले मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल से होती है। पूर्व में पकड़े गए कुछ बड़े माओवादियों ने इसका खुलासा भी किया था।
इधर, बीते दिन अल्मोड़ा में एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम की पकड़ में आए माओवादी भास्कर पांडे के पास भी इन राज्यों से पैसा आने की आशंका जताई जा रही है। तलाशी में उसके पास करीब 32 हजार रुपये की धनराशि भी बरामद हुई है। माओवादी बैंक खातों का इस्तेमाल नहीं करते हैं, ऐसे में इनके पास नकदी ही बरामद होती है।
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14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा
अल्मोड़ा। माओवादी भास्कर पांडे को गिरफ्तार करने के बाद मंगलवार को न्यायालय में पेश किया गया। माओवादी को 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में भेजा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पंकज भट्ट ने बताया कि इंटेलीजेंस पूछताछ कर जांच करेगी। भास्कर जनवरी से किसान आंदोलन में सक्रिय था। वह अल्मोड़ा में कभी लंबे समय तक नहीं रहा। पौड़ी समेत अन्य जिलों में लगातार घूमता रहता था। फिलहाल पूछताछ में जो-जो जानकारी मिलेगी उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
2006 से जुड़ा था संगठन से
अल्मोड़ा। माओवादी भास्कर पांडे उत्तराखंड में माओवाद की जड़ जमाने की कोशिश में जुटा था। भास्कर और उसके दो साथियों के विरुद्ध 2017 में विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने, सरकार के विरुद्ध जन युद्ध खड़ा करने और दीवारों, सार्वजनिक स्थानों पर सरकार और चुनाव विरोधी पोस्टर चिपकाने पर सोमेश्वर, द्वाराहाट थानों समेत राजस्व क्षेत्र और नैनीताल जिले में मुकदमा दर्ज किया गया था।
देवेंद्र चम्याल और भगवती भोज को पुलिस पहले ही चोरगलिया हल्द्वानी से गिरफ्तार कर चुकी थी। भास्कर पर 20 हजार का ईनाम घोषित किया गया था। पूछताछ में उसने बताया कि वह 2006 से माओवादी संगठन भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी से जुड़ा है। संगठन में उत्तराखंड के जोनल कमेटी के सचिव खीम सिंह बोरा, देवेंद्र और भगवती भी थे। चारों को जन आंदोलन करने, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने के निर्देश मिले थे। इसके लिए चारों जंगल में बैठक करके योजना बनाते थे। तय कर चिह्नित स्थानों पर माओवादी विचारधारा से संबंधित पोस्टर चिपकाते थे।
भास्कर को नियुक्त किया गया था एरिया कमांडर
अल्मोड़ा। पूछताछ में भास्कर पांडे ने बताया कि खीम सिंह बोरा उत्तराखंड के एरिया कमांडर थे। उनकी गिरफ्तारी के बाद संगठन उत्तराखंड में कमजोर हो गया था, जिसे मजबूत करने के लिए भास्कर को एरिया कमांडर नियुक्त किया गया था। वह राज्य में माओवाद की जड़ों को फिर से जमाने का कार्य कर रहा था। पुलिस का कहना है कि वह उत्तराखंड का आखिरी वांटेड माओवादी था, जिसे गिरफ्तार करके पुलिस ने माओवाद की ताबूत में आखिरी कील गाड़ दी है।
ये हुआ बरामद
अल्मोड़ा। भास्कर की तलाशी लेने पर उसके पास दो पेन ड्राइव, दो वोटर आइडी, एक वीवो कंपनी एंड्राइड मोबाइल फोन, आधार कार्ड, दो किताबें और 32,265 रुपये नगद बरामद हुए।
गिरफ्तारी टीम में यह रहे मौजूद
अल्मोड़ा। एसओजी प्रभारी नीरज भाकुनी, कांस्टेबल दिनेश नगरकोटी, संदीप सिंह, राजेश भट्ट, दीपक खनका, मोहन बोरा, एसटीएफ निरीक्षक एमपी सिंह, एसआई बृजभूषण गुरुरानी, एएसआई प्रकाश भगत, कांस्टेबल किशोर कुमार, महेंद्र गिरी, प्रमोद रौतेला, मनमोहन सिंह, नवीन कुमार।
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माओवादी एक स्थान पर बहुत कम ही रुकते हैं और लगातार स्थान परिवर्तन करते रहते हैं। जीवन यापन से लेकर स्थान परिवर्तन तक के लिए राशि की जरूरत होती है, जिसकी पूर्ति माओवाद का गढ़ माने जाने वाले मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल से होती है। पूर्व में पकड़े गए कुछ बड़े माओवादियों ने इसका खुलासा भी किया था।
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इधर, बीते दिन अल्मोड़ा में एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम की पकड़ में आए माओवादी भास्कर पांडे के पास भी इन राज्यों से पैसा आने की आशंका जताई जा रही है। तलाशी में उसके पास करीब 32 हजार रुपये की धनराशि भी बरामद हुई है। माओवादी बैंक खातों का इस्तेमाल नहीं करते हैं, ऐसे में इनके पास नकदी ही बरामद होती है।
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14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा
अल्मोड़ा। माओवादी भास्कर पांडे को गिरफ्तार करने के बाद मंगलवार को न्यायालय में पेश किया गया। माओवादी को 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में भेजा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पंकज भट्ट ने बताया कि इंटेलीजेंस पूछताछ कर जांच करेगी। भास्कर जनवरी से किसान आंदोलन में सक्रिय था। वह अल्मोड़ा में कभी लंबे समय तक नहीं रहा। पौड़ी समेत अन्य जिलों में लगातार घूमता रहता था। फिलहाल पूछताछ में जो-जो जानकारी मिलेगी उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
2006 से जुड़ा था संगठन से
अल्मोड़ा। माओवादी भास्कर पांडे उत्तराखंड में माओवाद की जड़ जमाने की कोशिश में जुटा था। भास्कर और उसके दो साथियों के विरुद्ध 2017 में विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने, सरकार के विरुद्ध जन युद्ध खड़ा करने और दीवारों, सार्वजनिक स्थानों पर सरकार और चुनाव विरोधी पोस्टर चिपकाने पर सोमेश्वर, द्वाराहाट थानों समेत राजस्व क्षेत्र और नैनीताल जिले में मुकदमा दर्ज किया गया था।
देवेंद्र चम्याल और भगवती भोज को पुलिस पहले ही चोरगलिया हल्द्वानी से गिरफ्तार कर चुकी थी। भास्कर पर 20 हजार का ईनाम घोषित किया गया था। पूछताछ में उसने बताया कि वह 2006 से माओवादी संगठन भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी से जुड़ा है। संगठन में उत्तराखंड के जोनल कमेटी के सचिव खीम सिंह बोरा, देवेंद्र और भगवती भी थे। चारों को जन आंदोलन करने, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने के निर्देश मिले थे। इसके लिए चारों जंगल में बैठक करके योजना बनाते थे। तय कर चिह्नित स्थानों पर माओवादी विचारधारा से संबंधित पोस्टर चिपकाते थे।
भास्कर को नियुक्त किया गया था एरिया कमांडर
अल्मोड़ा। पूछताछ में भास्कर पांडे ने बताया कि खीम सिंह बोरा उत्तराखंड के एरिया कमांडर थे। उनकी गिरफ्तारी के बाद संगठन उत्तराखंड में कमजोर हो गया था, जिसे मजबूत करने के लिए भास्कर को एरिया कमांडर नियुक्त किया गया था। वह राज्य में माओवाद की जड़ों को फिर से जमाने का कार्य कर रहा था। पुलिस का कहना है कि वह उत्तराखंड का आखिरी वांटेड माओवादी था, जिसे गिरफ्तार करके पुलिस ने माओवाद की ताबूत में आखिरी कील गाड़ दी है।
ये हुआ बरामद
अल्मोड़ा। भास्कर की तलाशी लेने पर उसके पास दो पेन ड्राइव, दो वोटर आइडी, एक वीवो कंपनी एंड्राइड मोबाइल फोन, आधार कार्ड, दो किताबें और 32,265 रुपये नगद बरामद हुए।
गिरफ्तारी टीम में यह रहे मौजूद
अल्मोड़ा। एसओजी प्रभारी नीरज भाकुनी, कांस्टेबल दिनेश नगरकोटी, संदीप सिंह, राजेश भट्ट, दीपक खनका, मोहन बोरा, एसटीएफ निरीक्षक एमपी सिंह, एसआई बृजभूषण गुरुरानी, एएसआई प्रकाश भगत, कांस्टेबल किशोर कुमार, महेंद्र गिरी, प्रमोद रौतेला, मनमोहन सिंह, नवीन कुमार।