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अग्निशमन विभाग को अब और कितना इंतजार कराएगा शासन
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अल्मोड़ा। जंगलों की आग हो या नगर क्षेत्र में कहीं आग की घटना हो अग्निशमन विभाग हमेशा से लोगों की मदद के लिए तत्पर रहा है। अल्मोड़ा जैसे घनी आबादी वाले शहर में तो अक्सर आग की घटनाएं होती रहती हैं। इसके बावजूद पुराने मॉडल के जीर्णशीर्ण वाहनों के साथ कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे अग्निशमन विभाग को विभागीय उच्चाधिकारियों का ही सहयोग नहीं मिल रहा है। जिले में 28 कर्मचारियों की कमी है। शासन में प्रस्तावित कर्मचारियों के खाली पदों को भरने और हाइड्रेंट लाइनों का प्रस्ताव शासन में डेढ़ साल से लंबित है।
आग की घटनाओं में जानमाल को बचाने के लिए अग्निशमन विभाग के कर्मचारी हमेशा से तैयार रहते हैं। कई बार एक ही समय पर अधिक जगहों पर अग्निकांड की घटनाएं हो जाती हैं लेकिन पर्याप्त संख्या न होने से विभाग के कर्मचारी सभी जगहों पर एक साथ नहीं जा पाते हैं।
करीब डेढ़ दो साल पहले अग्निशमन विभाग ने कर्मचारियों के पदों को भरने और करीब 56 नई हाइड्रेंट लाइनों का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। 26 के सापेक्ष अल्मोड़ा में 12, रानीखेत में 16 कर्मचारी कम हैं। इसी तरह अल्मोड़ा नगर में 31, रानीखेत में 18 हाइड्रेंट लाइनें आबादी के लिहाज से काफी कम हैं। नगर में अधिकतर हाइड्रेंट लाइनें बाजार क्षेत्र में ही हैं।
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रानीधारा, पांडेखोला, लोअर मालरोड, नरसिंह बाड़ी, जाखनदेवी जैसे आबादी वाले, सड़क मार्ग से सटे इलाकों में हाइड्रेंट लाइन नहीं है। हाइड्रेंट लाइन न होने से आग की घटनाओं के समय अग्निशमन विभाग को दूर जगहों से पानी भरकर घटना स्थल तक ले जाना पड़ता है।
2004 मॉडल के वाहन बुझा रहे आग
अल्मोड़ा। अग्निशमन विभाग के पास मुख्यालय में दो बड़े और एक छोटा फायर टेंडर (अग्निशमन विभाग का बड़ा वाहन) है। वहीं रानीखेत में दो वाहन हैं। ये वाहन भी 2004 मॉडल के हैं और काफी खराब हालत में हैं। इन वाहनों को निष्प्रयोज्य कर नए वाहन लाने की कार्रवाई भी नहीं हुई।
अग्निशमन विभाग में कर्मचारियों की काफी कमी है। नई हाइड्रेंट लाइनें भी लगानी जरूरी हैं। वाहन भी 15 साल पुराने हो चुके हैं। शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, स्वीकृति का इंतजार है।
- गिरीश सिंह बिष्ट, फायर स्टेशन अधिकारी, अल्मोड़ा।
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आग की घटनाओं में जानमाल को बचाने के लिए अग्निशमन विभाग के कर्मचारी हमेशा से तैयार रहते हैं। कई बार एक ही समय पर अधिक जगहों पर अग्निकांड की घटनाएं हो जाती हैं लेकिन पर्याप्त संख्या न होने से विभाग के कर्मचारी सभी जगहों पर एक साथ नहीं जा पाते हैं।
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करीब डेढ़ दो साल पहले अग्निशमन विभाग ने कर्मचारियों के पदों को भरने और करीब 56 नई हाइड्रेंट लाइनों का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। 26 के सापेक्ष अल्मोड़ा में 12, रानीखेत में 16 कर्मचारी कम हैं। इसी तरह अल्मोड़ा नगर में 31, रानीखेत में 18 हाइड्रेंट लाइनें आबादी के लिहाज से काफी कम हैं। नगर में अधिकतर हाइड्रेंट लाइनें बाजार क्षेत्र में ही हैं।
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रानीधारा, पांडेखोला, लोअर मालरोड, नरसिंह बाड़ी, जाखनदेवी जैसे आबादी वाले, सड़क मार्ग से सटे इलाकों में हाइड्रेंट लाइन नहीं है। हाइड्रेंट लाइन न होने से आग की घटनाओं के समय अग्निशमन विभाग को दूर जगहों से पानी भरकर घटना स्थल तक ले जाना पड़ता है।
2004 मॉडल के वाहन बुझा रहे आग
अल्मोड़ा। अग्निशमन विभाग के पास मुख्यालय में दो बड़े और एक छोटा फायर टेंडर (अग्निशमन विभाग का बड़ा वाहन) है। वहीं रानीखेत में दो वाहन हैं। ये वाहन भी 2004 मॉडल के हैं और काफी खराब हालत में हैं। इन वाहनों को निष्प्रयोज्य कर नए वाहन लाने की कार्रवाई भी नहीं हुई।
अग्निशमन विभाग में कर्मचारियों की काफी कमी है। नई हाइड्रेंट लाइनें भी लगानी जरूरी हैं। वाहन भी 15 साल पुराने हो चुके हैं। शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, स्वीकृति का इंतजार है।
- गिरीश सिंह बिष्ट, फायर स्टेशन अधिकारी, अल्मोड़ा।