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हवालबाग ब्लाक के चार गांवों के किसान करेंगे सामू हिक खेती
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कसून गांव में किसानों को उपकरण देते अनुसंधानकर्ता।
- फोटो : ALMORA
अल्मोड़ा। हवालबाग विकासखंड के चार गांवों के ग्रामीण सामूहिक खेती करेंगे। इसके लिए किसानों के समूह गठित किए गए हैं। इससे क्षेत्र में पलायन पर भी अंकुश लगेगा। राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के तहत वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार से वित्तपोषित परियोजना के तहत इन गांवों में योजना पर काम शुरू हो गया है।
ग्राम पंचायत कसून, भट्ट गांव, पाटिया और कोट्यूड़ा गांव में सामूहिक खेती के लिए 10 एकड़ भूमि पायलट प्रोजेक्ट के तहत चयन की गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आनंद महाविद्यालय के डॉ. प्रभाष पांडे ने बताया कि इस भूमि पर की जाने वाली खेती को जंगली जानवरों सुअर, बंदरों से बचाने के लिए कसूरन, पाटिया और कोट्यूड़ा में एक-एक इंफ्रा रेड कैमरे लगाए गए हैं। शीघ्र ही सौर्य बाड़े (सौर ऊर्जा फिनिशिंग) भी लगाए जाएंगे।
योजना के क्रियान्वयन और सामूहिक खेती को प्रोत्साहन करने के लिए चारों गांवों में कृषकों के समूह गठित किए गए हैं। शिक्षक अनुसंधानकर्ताओं और चार गांवों के ग्राम समूहों के मध्य समझौता हुआ है। जल्दी ही इन समूहों को पंजीकृत कराया जाएगा। जिससे कि इन गांवों में गठित समूहों को अन्य सरकारी योजनाओं का भी लाभ भी मिल सके।
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इन समूहों के विकास के लिए नौ हॉर्स पावर का एक ट्रैक्टर भी उपलब्ध करा दिया है। जिससे खेतीबाड़ी के कार्यों में किसानों को मदद मिलेगी। इन समूहों से जुड़े किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने के साथ ही भूमि का मृदा परीक्षण भी कराया जा रहा है। जिससे किसान भूमि में अधिक उपज देने वाली फसल का चुनाव कर सकें। इससे सालों से बंजर पड़ी जमीन पर दोबारा खेती शुरू होगी और ग्रामीण खुशहाल होंगे। अनुसंधानकर्ताओं दिल्ली विवि के शिक्षक डॉ. प्रभाष पांडे, डॉ. सीमा गुप्ता, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राकेश, डॉ. मुक्ता मजूमदार किसानों को सहयोग कर रहे हैं।
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ग्राम पंचायत कसून, भट्ट गांव, पाटिया और कोट्यूड़ा गांव में सामूहिक खेती के लिए 10 एकड़ भूमि पायलट प्रोजेक्ट के तहत चयन की गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आनंद महाविद्यालय के डॉ. प्रभाष पांडे ने बताया कि इस भूमि पर की जाने वाली खेती को जंगली जानवरों सुअर, बंदरों से बचाने के लिए कसूरन, पाटिया और कोट्यूड़ा में एक-एक इंफ्रा रेड कैमरे लगाए गए हैं। शीघ्र ही सौर्य बाड़े (सौर ऊर्जा फिनिशिंग) भी लगाए जाएंगे।
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योजना के क्रियान्वयन और सामूहिक खेती को प्रोत्साहन करने के लिए चारों गांवों में कृषकों के समूह गठित किए गए हैं। शिक्षक अनुसंधानकर्ताओं और चार गांवों के ग्राम समूहों के मध्य समझौता हुआ है। जल्दी ही इन समूहों को पंजीकृत कराया जाएगा। जिससे कि इन गांवों में गठित समूहों को अन्य सरकारी योजनाओं का भी लाभ भी मिल सके।
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इन समूहों के विकास के लिए नौ हॉर्स पावर का एक ट्रैक्टर भी उपलब्ध करा दिया है। जिससे खेतीबाड़ी के कार्यों में किसानों को मदद मिलेगी। इन समूहों से जुड़े किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने के साथ ही भूमि का मृदा परीक्षण भी कराया जा रहा है। जिससे किसान भूमि में अधिक उपज देने वाली फसल का चुनाव कर सकें। इससे सालों से बंजर पड़ी जमीन पर दोबारा खेती शुरू होगी और ग्रामीण खुशहाल होंगे। अनुसंधानकर्ताओं दिल्ली विवि के शिक्षक डॉ. प्रभाष पांडे, डॉ. सीमा गुप्ता, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राकेश, डॉ. मुक्ता मजूमदार किसानों को सहयोग कर रहे हैं।