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द्वाराहाट के विकास पर जनता की मिली जुली प्रतिक्रिया
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जानकी देवी
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। राज्य बनने के बाद 2002 में अस्तित्व में आई द्वाराहाट विधानसभा क्षेत्र में हर बार विकास कार्यों के दावे किए जाते हैं। इस बार यहां से भाजपा के ही विधायक भी थे और भाजपा की सरकार। सरकार ने द्वाराहाट विधानसभा को विकासकार्यों में नंबर वन विधानसभा का तमगा भी दिया लेकिन यहां के निवासियों ने सरकारी प्रयासों को नाकाफी बताया है।
2002 में उक्रांद के थिंक टैंक माने जाने वाले स्व. बिपिन त्रिपाठी यहां से पहले विधायक बने। वर्ष 2004 में उनके निधन के बाद 2012 तक यहां उक्रांद का कब्जा रहा। वर्ष 2012 में कांग्रेस तो वर्ष 2017 में यहां भाजपा काबिज हुई। किसानों ने जहां जंगली और वन्यजीवों के आतंक को सबसे बड़ी परेशानी बताया है तो कई लोगों ने वर्षों से मात्र चार किमी सड़क न बन पाने का भी दर्द बयां किया।
क्षेत्र में विकास नहीं हुए हैं। वर्ष 2004 में स्वीकृत बयेला-नाड़ आठ किमी मोटर मार्ग मात्र चार किमी ही बन पाया है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में कितने विकास कार्य हुए। - बिपिन पंत, पूर्व प्रधान और राज्य आंदोलनकारी ग्राम नाड़ फल्द्वाड़ी।
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कोविडकाल में व्यवसायियों को काफी दिक्कतें हुईं। महीनों तक दुकानें बंद रहने से आर्थिक रूप से परेशान रही। उन्हें कोई मुआवजा जनप्रतिनिधि नहीं दिला पाए। कई गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। -बसंत लाल साह, व्यापारी, द्वाराहाट।
क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों में उल्लेखनीय विकास कार्यों को अमलीजामा पहनाया गया है। इसका फायदा भाजपा को मिलेगा। विधायक ने ग्रामीण क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया है। -भूपेंद्र कांडपाल, अध्यक्ष केसीडीएफ अल्मोड़ा-बागेश्वर।
सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वायदा किया था जो कोरा ही साबित हुआ। लावारिस पशुओं, जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए कोई नीति नहीं बन पाई। इससे ग्रामीण त्रस्त है। -जानकी देवी, पूर्व प्रधान, नट्टागुल्ली द्वाराहाट।
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2002 में उक्रांद के थिंक टैंक माने जाने वाले स्व. बिपिन त्रिपाठी यहां से पहले विधायक बने। वर्ष 2004 में उनके निधन के बाद 2012 तक यहां उक्रांद का कब्जा रहा। वर्ष 2012 में कांग्रेस तो वर्ष 2017 में यहां भाजपा काबिज हुई। किसानों ने जहां जंगली और वन्यजीवों के आतंक को सबसे बड़ी परेशानी बताया है तो कई लोगों ने वर्षों से मात्र चार किमी सड़क न बन पाने का भी दर्द बयां किया।
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क्षेत्र में विकास नहीं हुए हैं। वर्ष 2004 में स्वीकृत बयेला-नाड़ आठ किमी मोटर मार्ग मात्र चार किमी ही बन पाया है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में कितने विकास कार्य हुए। - बिपिन पंत, पूर्व प्रधान और राज्य आंदोलनकारी ग्राम नाड़ फल्द्वाड़ी।
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कोविडकाल में व्यवसायियों को काफी दिक्कतें हुईं। महीनों तक दुकानें बंद रहने से आर्थिक रूप से परेशान रही। उन्हें कोई मुआवजा जनप्रतिनिधि नहीं दिला पाए। कई गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। -बसंत लाल साह, व्यापारी, द्वाराहाट।
क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों में उल्लेखनीय विकास कार्यों को अमलीजामा पहनाया गया है। इसका फायदा भाजपा को मिलेगा। विधायक ने ग्रामीण क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया है। -भूपेंद्र कांडपाल, अध्यक्ष केसीडीएफ अल्मोड़ा-बागेश्वर।
सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वायदा किया था जो कोरा ही साबित हुआ। लावारिस पशुओं, जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए कोई नीति नहीं बन पाई। इससे ग्रामीण त्रस्त है। -जानकी देवी, पूर्व प्रधान, नट्टागुल्ली द्वाराहाट।

बसंत लाल- फोटो : RANIKHET