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गन्ने की मूर्ति बनाकर पूजा करने से मां लक्ष्मी होती हैं प्रसन्न
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अल्मोड़ा के माल रोड में गन्ना बेचते काश्तकार। संवाद
- फोटो : ALMORA
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा में रविवार को गन्ने की बिक्री में उछाल आया। सोमवार को लक्ष्मी पूजन के चलते लोगों ने खूब गन्ना खरीदा। कुमाऊं में गन्ने से लक्ष्मी की मूर्ति बनाने की परंपरा है।
पंडितों के मुताबिक मां लक्ष्मी को गन्ना प्रिय है। उनके सबरस भोजन में गन्ना भी शामिल है। गन्ने को औषधि का द्योतक भी माना जाता है। मान्यता है कि लक्ष्मी का जन्म इक्षु सागर से हुआ। इक्षु सागर का जल मीठा था। इस वजह से भी मां लक्ष्मी की मूर्ति गन्ने से बनाई जाती है अथवा उनके प्रतीक के रूप में गन्ने का पूजन होता है। अल्मोड़ा में एक गन्ना 60 से 100 रुपये तक की दर से बिका।
रंगवाली पिछौड़ा से शृंगार कर लगाया जाता है मुखौटा
अल्मोड़ा। लक्ष्मी पूजन के दिन गन्ने के तने को काटकर उसके टुकड़ों से मां लक्ष्मी की मूर्ति का निर्माण किया जाता है। गन्ने से मूर्ति का ढांचा तैयार करके उसमें देवी का मुखौटा फिट किया जाता है। फिर उसे रंगवाली पिछौड़ा पहनाकर शृंगार करते हैं। सुहागिनें अपने सोने के आभूषणों से देवी को पहनाकर सुख-शांति का आशीर्वाद मांगती हैं।
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पंडितों के मुताबिक मां लक्ष्मी को गन्ना प्रिय है। उनके सबरस भोजन में गन्ना भी शामिल है। गन्ने को औषधि का द्योतक भी माना जाता है। मान्यता है कि लक्ष्मी का जन्म इक्षु सागर से हुआ। इक्षु सागर का जल मीठा था। इस वजह से भी मां लक्ष्मी की मूर्ति गन्ने से बनाई जाती है अथवा उनके प्रतीक के रूप में गन्ने का पूजन होता है। अल्मोड़ा में एक गन्ना 60 से 100 रुपये तक की दर से बिका।
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रंगवाली पिछौड़ा से शृंगार कर लगाया जाता है मुखौटा
अल्मोड़ा। लक्ष्मी पूजन के दिन गन्ने के तने को काटकर उसके टुकड़ों से मां लक्ष्मी की मूर्ति का निर्माण किया जाता है। गन्ने से मूर्ति का ढांचा तैयार करके उसमें देवी का मुखौटा फिट किया जाता है। फिर उसे रंगवाली पिछौड़ा पहनाकर शृंगार करते हैं। सुहागिनें अपने सोने के आभूषणों से देवी को पहनाकर सुख-शांति का आशीर्वाद मांगती हैं।
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