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Almora News: हौसले से सपनों को साकार कर रही मूक बधिर नेहा
Wed, 03 Dec 2025 12:05 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Wed, 03 Dec 2025 12:05 AM IST
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नेहा पांडेय।
- फोटो : स्कूटी में लगी आग को बुझाते लोग। वीडियो ग्रैब
बागेश्वर। अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के मौके पर जहां सरकारें विशेष बच्चों को सुविधाएं देने के दावे करती हैं, वहीं जिले की एक मूक-बधिर बेटी की कहानी इन दावों की पोल खोलती है। जिले की बेटी नेहा पांडेय ने साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। न सुन सकने और न बोल सकने वाली नेहा को पहले कभी सरकारी और निजी विद्यालयों ने प्रवेश देने से मना कर दिया था, लेकिन आज वह पढ़ाई में भी मेधावी है। इस साल अप्रैल में संपन्न हुई हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा नेहा ने 70 प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण की थी।
नेहा का संघर्ष शुरू से ही आसान नहीं रहा। जिले में दिव्यांग बच्चों के लिए कोई विशेष विद्यालय नहीं है। सरकारी और निजी विद्यालयों ने नेहा को प्रवेश देने से मना कर दिया था। इन विद्यालयों का तर्क था कि विशेष बच्चों को पढ़ाने के लिए पूरे उपकरण उनके लिए संभव नहीं हैं। इन मुश्किलों के बावजूद नेहा की मां अनीता पांडेय ने हार नहीं मानी। उन्होंने पहले अपनी बड़ी बेटी दीक्षा पांडेय को पढ़ाते समय नेहा को भी साथ में बैठाना शुरू किया। बड़ी बहन को कॉपी में लिखते देख नेहा ने कई चीजें घर पर ही सीख लीं।
नेहा की मां अनीता ने बताया कि बोर्ड परीक्षा में पास होने की उम्मीद भी नहीं थी। उन्होंने कई लोगों से ट्यूशन पढ़ाने की बात की लेकिन हर किसी ने मना कर दिया। लोगों को लगता था कि उन्हें नेहा की विशेष भाषा नहीं आती। नेहा ने अपनी पढ़ाई मुख्य रूप से कक्षा में बोर्ड पर लिखी चीजों, किताबों और ऑनलाइन उपलब्ध शिक्षण सामग्री से की। नौवीं कक्षा से नेहा को विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज मंडलसेरा में प्रवेश मिला।
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विज्ञान में 75 और सामाजिक विज्ञान में 83 अंक प्राप्त कर सबको चौंकाया
नेहा ने इस साल अप्रैल में संपन्न हुई हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा 70 प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण की थी। उन्होंने विज्ञान में 75 अंक, सामाजिक विज्ञान में 83 अंक, अंग्रेजी में 60 अंक, हिंदी में 72 अंक, संस्कृत में 67 अंक, गणित में 60 अंक पाकर सबको चौंकाया। वर्तमान में नेहा ग्यारहवीं कक्षा में वाणिज्य वर्ग की पढ़ाई कर रही हैं। नेहा का सपना पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनना है।
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नेहा का संघर्ष शुरू से ही आसान नहीं रहा। जिले में दिव्यांग बच्चों के लिए कोई विशेष विद्यालय नहीं है। सरकारी और निजी विद्यालयों ने नेहा को प्रवेश देने से मना कर दिया था। इन विद्यालयों का तर्क था कि विशेष बच्चों को पढ़ाने के लिए पूरे उपकरण उनके लिए संभव नहीं हैं। इन मुश्किलों के बावजूद नेहा की मां अनीता पांडेय ने हार नहीं मानी। उन्होंने पहले अपनी बड़ी बेटी दीक्षा पांडेय को पढ़ाते समय नेहा को भी साथ में बैठाना शुरू किया। बड़ी बहन को कॉपी में लिखते देख नेहा ने कई चीजें घर पर ही सीख लीं।
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नेहा की मां अनीता ने बताया कि बोर्ड परीक्षा में पास होने की उम्मीद भी नहीं थी। उन्होंने कई लोगों से ट्यूशन पढ़ाने की बात की लेकिन हर किसी ने मना कर दिया। लोगों को लगता था कि उन्हें नेहा की विशेष भाषा नहीं आती। नेहा ने अपनी पढ़ाई मुख्य रूप से कक्षा में बोर्ड पर लिखी चीजों, किताबों और ऑनलाइन उपलब्ध शिक्षण सामग्री से की। नौवीं कक्षा से नेहा को विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज मंडलसेरा में प्रवेश मिला।
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विज्ञान में 75 और सामाजिक विज्ञान में 83 अंक प्राप्त कर सबको चौंकाया
नेहा ने इस साल अप्रैल में संपन्न हुई हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा 70 प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण की थी। उन्होंने विज्ञान में 75 अंक, सामाजिक विज्ञान में 83 अंक, अंग्रेजी में 60 अंक, हिंदी में 72 अंक, संस्कृत में 67 अंक, गणित में 60 अंक पाकर सबको चौंकाया। वर्तमान में नेहा ग्यारहवीं कक्षा में वाणिज्य वर्ग की पढ़ाई कर रही हैं। नेहा का सपना पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनना है।