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Almora News: रायहंदा की जड़ों से छिपा है स्तन कैंसर का इलाज
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अल्मोड़ा। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उगने वाली औषधीय वनस्पति एरिजेरॉन मल्टीरेडिएटस (रायहंदा) में कैंसर जैसी घातक बीमारी से लड़ने के गुण मौजूद हैं। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय (एसएसजे विवि) के शोधार्थियों ने रायहंदा पौधे की जड़ों से ऐसे यौगिकों की पहचान की है जो स्तन कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि करने वाले प्रोटीन के प्रभाव को नष्ट करने में कारगर साबित हुए हैं। यह शोध भविष्य में स्तन कैंसर के सस्ते और सुरक्षित उपचार का आधार बन सकता है।
एसएसजे विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान और वनस्पति विज्ञान के शोधकर्ताओं ने पिथौरागढ़ छिपलाकेदार से एकत्रित औषधीय पौधे रायहंदा की जड़ों के हेक्सेन और क्लोरोफॉर्म अर्क का अध्ययन किया। गैस क्रोमैटोग्राफी और मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक से पौधे की जड़ों में मौजूद 13 प्रमुख फाइटोकेमिकल यौगिकों की पहचान की गई।
इसके बाद आधुनिक कंप्यूटेशनल तकनीकों और मॉलिक्यूलर डॉकिंग के इन यौगिकों का स्तन कैंसर के लिए जिम्मेदार प्रोटीन ईजीएफआर और एस्ट्रोजन रिसेप्टर अल्फा पर परीक्षण किया। इन यौगिकों में एस्पिडिनोल यौगिक सबसे अधिक प्रभावी पाया गया। यह यौगिक स्तन कैंसर से जुड़े इन दोनों मुख्य प्रोटीन के प्रभाव को नियंत्रित में कारगर साबित हुआ। शोधकर्ताओं के मुताबिक यदि इन प्रोटीन की सक्रियता को समय रहते नियंत्रित किया जाए तो कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने की गति को रोका जा सकता है। संवाद
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सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव पर भी असरदार रहे यौगिक
शोध के दौरान पौधे से प्राप्त थुनबर्गोल और स्टिग्मास्ट-5-ईन यौगिकों ने सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव से जुड़े प्रोटीन के प्रभाव को रोकने में सफल रहे। ऑक्सीडेटिव तनाव को कैंसर, हृदय रोग और कई अन्य गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है। ऐसे में रायहंदा का पौधा कैंसर, सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव से जूझ रहे मरीजों के लिए वरदान साबित हो सकता है।
शुगर, गठिया और यकृत संबंधी बीमारियों में किया जाता रहा है उपयोग
एरिजेरॉन मल्टीरेडिएटस तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। इस पौधे का प्रयोग पहले से ही मधुमेह, गठिया और यकृत संबंधी रोगों के उपचार में किया जाता रहा है। एसएसजे विवि के शोधार्थियों के शोध ने इस पौधे में कैंसररोधी क्षमता का अध्ययन कर इसके औषधीय महत्व को वैज्ञानिक आधार दिया है।
हेक्सेन अर्क से प्राप्त हुए ये यौगिक
हेक्सेन और क्लोरोफॉर्म अर्क के अध्ययन के बाद एथेनोन, 1-(3-एथिलऑक्सिरैनिल), 3-हेक्सेन-2-ओन, 5,5-डाइएथिलट्राइडेकैन, मिरिस्टिक अम्ल विनाइल एस्टर, एस्पिडिनोल, बेंजोइक अम्ल, 4-हाइड्रॉक्सी-2,6-डाइमिथॉक्सी, मिथाइल एस्टर, एन-हेक्साडेकैनोइक अम्ल, एडामैंटेनकार्बोक्सिलिक अम्ल, हेप्टाडेसिल एस्टर, लिनोलेओयल क्लोराइड, ऑक्टाडेकैनोइक अम्ल, 2,6,10,14-हेक्साडेकाटेट्राएन-1-ओल, 3,7,11,15-टेट्रामिथाइल-, एसी, पिवालिक अम्ल, पेंटाफ्लोरोबेंज़िल एस्टर, थुनबर्गोल यह सक्रिय यौगिक प्राप्त हुए।
हर दिन करीब 17 महिलाओं की होती है मौत
डब्लूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक स्तन कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर वर्ष स्तन कैंसर के करीब दो से 2.5 लाख मामले दर्ज होते हैं। इस बीमारी से जूझते हुए 17 से अधिक महिलाओं की मौत हो जाती है। ऐसे में यह शोध कैंसर रोगियों के लिए नई उम्मीद बन सकती है।
शोध में ये रहे शामिल
शोध दल में रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. देवेंद्र सिंह धामी, डॉ. चारू चंद्र पंत, जंतु विज्ञान की डॉ. प्रीति पंत, शोधार्थी रितुल कुमार शामिल रहे।
कोट
एरिजेरॉन मल्टीरेडिएटस पौधे के यौगिकों में स्तन कैंसर के मुख्य प्रोटीनों के विरुद्ध लड़ने की क्षमता है। अगर शोध को क्लीनिकल ट्रायल में भी सफलता मिलती है तो यह स्तन कैंसर की दवा विकसित करने की दिशा में बड़ी कामयाबी हो सकती है। - डॉ. देवेंद्र सिंह धामी, मुख्य अन्वेषक रसायन विज्ञान विभाग एसएसजे विवि अल्मोड़ा
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एसएसजे विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान और वनस्पति विज्ञान के शोधकर्ताओं ने पिथौरागढ़ छिपलाकेदार से एकत्रित औषधीय पौधे रायहंदा की जड़ों के हेक्सेन और क्लोरोफॉर्म अर्क का अध्ययन किया। गैस क्रोमैटोग्राफी और मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक से पौधे की जड़ों में मौजूद 13 प्रमुख फाइटोकेमिकल यौगिकों की पहचान की गई।
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इसके बाद आधुनिक कंप्यूटेशनल तकनीकों और मॉलिक्यूलर डॉकिंग के इन यौगिकों का स्तन कैंसर के लिए जिम्मेदार प्रोटीन ईजीएफआर और एस्ट्रोजन रिसेप्टर अल्फा पर परीक्षण किया। इन यौगिकों में एस्पिडिनोल यौगिक सबसे अधिक प्रभावी पाया गया। यह यौगिक स्तन कैंसर से जुड़े इन दोनों मुख्य प्रोटीन के प्रभाव को नियंत्रित में कारगर साबित हुआ। शोधकर्ताओं के मुताबिक यदि इन प्रोटीन की सक्रियता को समय रहते नियंत्रित किया जाए तो कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने की गति को रोका जा सकता है। संवाद
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सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव पर भी असरदार रहे यौगिक
शोध के दौरान पौधे से प्राप्त थुनबर्गोल और स्टिग्मास्ट-5-ईन यौगिकों ने सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव से जुड़े प्रोटीन के प्रभाव को रोकने में सफल रहे। ऑक्सीडेटिव तनाव को कैंसर, हृदय रोग और कई अन्य गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है। ऐसे में रायहंदा का पौधा कैंसर, सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव से जूझ रहे मरीजों के लिए वरदान साबित हो सकता है।
शुगर, गठिया और यकृत संबंधी बीमारियों में किया जाता रहा है उपयोग
एरिजेरॉन मल्टीरेडिएटस तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। इस पौधे का प्रयोग पहले से ही मधुमेह, गठिया और यकृत संबंधी रोगों के उपचार में किया जाता रहा है। एसएसजे विवि के शोधार्थियों के शोध ने इस पौधे में कैंसररोधी क्षमता का अध्ययन कर इसके औषधीय महत्व को वैज्ञानिक आधार दिया है।
हेक्सेन अर्क से प्राप्त हुए ये यौगिक
हेक्सेन और क्लोरोफॉर्म अर्क के अध्ययन के बाद एथेनोन, 1-(3-एथिलऑक्सिरैनिल), 3-हेक्सेन-2-ओन, 5,5-डाइएथिलट्राइडेकैन, मिरिस्टिक अम्ल विनाइल एस्टर, एस्पिडिनोल, बेंजोइक अम्ल, 4-हाइड्रॉक्सी-2,6-डाइमिथॉक्सी, मिथाइल एस्टर, एन-हेक्साडेकैनोइक अम्ल, एडामैंटेनकार्बोक्सिलिक अम्ल, हेप्टाडेसिल एस्टर, लिनोलेओयल क्लोराइड, ऑक्टाडेकैनोइक अम्ल, 2,6,10,14-हेक्साडेकाटेट्राएन-1-ओल, 3,7,11,15-टेट्रामिथाइल-, एसी, पिवालिक अम्ल, पेंटाफ्लोरोबेंज़िल एस्टर, थुनबर्गोल यह सक्रिय यौगिक प्राप्त हुए।
हर दिन करीब 17 महिलाओं की होती है मौत
डब्लूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक स्तन कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर वर्ष स्तन कैंसर के करीब दो से 2.5 लाख मामले दर्ज होते हैं। इस बीमारी से जूझते हुए 17 से अधिक महिलाओं की मौत हो जाती है। ऐसे में यह शोध कैंसर रोगियों के लिए नई उम्मीद बन सकती है।
शोध में ये रहे शामिल
शोध दल में रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. देवेंद्र सिंह धामी, डॉ. चारू चंद्र पंत, जंतु विज्ञान की डॉ. प्रीति पंत, शोधार्थी रितुल कुमार शामिल रहे।
कोट
एरिजेरॉन मल्टीरेडिएटस पौधे के यौगिकों में स्तन कैंसर के मुख्य प्रोटीनों के विरुद्ध लड़ने की क्षमता है। अगर शोध को क्लीनिकल ट्रायल में भी सफलता मिलती है तो यह स्तन कैंसर की दवा विकसित करने की दिशा में बड़ी कामयाबी हो सकती है। - डॉ. देवेंद्र सिंह धामी, मुख्य अन्वेषक रसायन विज्ञान विभाग एसएसजे विवि अल्मोड़ा