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आयुष प्रदेश तो दूर की कौड़ी, वर्षों से नहीं सुधर पा रही को-आपरेटिव ड्रग फैक्ट्री की हालत

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 04 Sep 2022 11:27 PM IST
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Co-oparative Drug Factory in Ranikhet
रानीखेत स्थित को आपरेटिव ड्रग फैक्ट्री। संवाद - फोटो : RANIKHET
रानीखेत (अल्मोड़ा)। गनियाद्योली स्थित कोऑपरेटिव ड्रग फैक्टरी (सीडीएफ) बदहाली के दौर से गुजर रही है। एक दशक पहले सवा करोड़ रुपये सालाना का मुनाफा कमाने वाली यह फैक्टरी अब हर साल डेढ़ करोड़ से अधिक का नुकसान उठा रही है। आयुर्वेदिक पद्धति से सैकड़ों किस्म की दवाइयां बनाने के लिए मशहूर इस फैक्टरी को अब जड़ी बूटियों के लिए भी दूसरे प्रदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है। फैक्टरी में अब मांग पर ही दवाइयां बन रही हैं। पिछले कुछ सालों इस कंपनी को दवा उत्पादन के लिए आर्डर भी नहीं मिले हैं। कभी 300 कर्मचारियों वाली यह फैक्टरी अब 15 कर्मचारियों पर निर्भर रह गई है, इसमें से भी तीन कर्मचारी कुछ दिनों में सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
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भारतरत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत ने 1954 में गनियाद्योली में केसीडीएफ की भूमि पर ड्रग फैक्टरी की स्थापना की। फैक्टरी के पास ही भेषज विकास संघ की भूमि पर जड़ी बूटियों का उत्पादन होता था। इनमें च्यवनप्राश, आसव, अशोकारिस्ट, त्रिफला, गुगुल, गंधक रसायन, अभ्रक भष्म, लवण भास्कर चूर्ण, आसव बटिया सहित उदर रोगों और गठिया वात से संबंधित कुल 300 प्रकार की दवाइयां शामिल हैं। राज्य बनने के बाद फैक्टरी के दिन बहुरने की उम्मीद थी लेकिन सरकारों के उदासीन रवैये के कारण भेषज कार्यालय ही बंद हो गया।
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जड़ी बूटियों का उत्पादन भी ठप हो गया। अब फैक्टरी को जड़ी बूटियों के लिए दिल्ली, हरिद्वार, हाथरस अन्य प्रदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है। चार प्रतिशत महंगे दामों पर जड़ी बूटियां यहां तक पहुंचती हैं। वर्ष 2005 में इसके संचालन की जिम्मेदारी उत्तराखंड कोऑपरेटिव संघ को मिली। इसके बाद कुछ साल आमद भी अच्छी हुई और फैक्टरी लाभ में भी रही लेकिन पिछले कुछ सालों से उत्तराखंड से भी यहां दवाइयों के आदेश नहीं मिल सके हैं।
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फैक्टरी की हालत से डीएम को अवगत कराया है और सरकार के सम्मुख भी इस समस्या को उठाऊंगा। बाजार में पर्वतीय वनस्पतियों से निर्मित औषधियों की अत्यधिक मांग है और शोध और विकास की अपार संभावनाएं भी हैं। इसके सुदृढ़ीकरण का प्रस्ताव जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को जाना नितांत जरूरी है।-डॉ. प्रमोद नैनवाल, विधायक रानीखेत।

फैक्टरी में कर्मचारियों की बेहद कमी है। आर्डर नहीं मिल रहे हैं। कई कर्मचारी सेवानिवृत्त होने की कगार पर हैं। डीएम का भी निरीक्षण कराया गया है। सरकारों ने अपने ही संसाधनों को विकसित करने की तरफ ध्यान नहीं दिया, इसका ताजा उदाहरण ड्रग फैक्टरी है। -मोहन नेगी, अध्यक्ष, श्रमिक संघ, कोऑपरेटिव ड्रग फैक्टरी रानीखेत।
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