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वजूद को बचाने को जूझ रहा चिलियानौला आईटीआई

Sun, 22 Oct 2017 10:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा Updated Sun, 22 Oct 2017 10:05 PM IST
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Chiliyanullah ITI battling to save lives
इसी कमरे में चल रहा आईटीआई। - फोटो : अमर उजाला

 वर्षों पूर्व स्थापित आईटीआई केंद्र अपने वजूद को बचाने की जंग लड़ रहा है। चिलियानौला स्थित एकमात्र आईटीआई के पास अपना भवन तक नहीं है। सरकारी तंत्र का हाल यह है कि चार में से तीन ट्रेड यहां बंद हो चुके हैं। संस्थान छोटे से किराए के भवन में चल रहा है। 

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रानीखेत में 1986 में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की स्वीकृति हुई, लेकिन भवन के लिए भूमि आज तक नहीं मिल पाई। वर्तमान में यह संस्थान चिलियानौला में एक किराए के भवन में चल रहा है।
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स्थापना के वक्त जहां इस केंद्र में इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रीशियन, मोटर मैकेनिक, हिंदी आशुलिपि ट्रेड में प्रशिक्षण दिया गया, लेकिन राज्य बनने के बाद 2002 में मोटर मैकेनिक का प्रशिक्षण बंद हुआ और मशीनें हल्द्वानी आईटीआई में शिफ्ट कर दी गईं। 2007 में हिंदी आशुलिपि का प्रशिक्षण भी बंद है। अगस्त 2013 इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेड भी बंद हो चुका है। वर्तमान में संस्थान में मात्र इलेक्ट्रिशियन का ट्रेड संचालित हो रहा है। जिसमें 15 बच्चे अध्ययनरत हैं।  टूरिज्म गाइड और डाटा इंट्री आपरेटर का प्रशिक्षण भी शुरू नहीं हो सका है। यहां ना तो पूरे कर्मचारी हैं और ना मशीनें।  लोगों का कहना है कि पुराने तकनीकी संस्थानों के विकास की तंत्र को कोई परवाह नहीं है। गुणवत्तायुक्त तकनीकी शिक्षा के लिए ही पर्वतीय क्षेत्र के युवा लगातार पलायन कर रहे हैं। 
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कोट
आईटीआई भवन चिलियानौला में स्थापना के समय से ही किराए पर चल रहा है। संस्थान के लिए अब भूमि चयनित कर ली गई है, शीघ्र ही भवन निर्माण की उम्मीद है।
केआर आर्या, कार्यदेशक, चिलियानौला आईटीआई। 


 
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