नवीन भट्ट रानीखेत (अल्मोड़ा)। पर्यटन नगरी के विश्व प्रसिद्ध चौबटिया गार्डन पर भी कोरोना लॉकडाउन की तगड़ी मार पड़ी है। हर साल यहां दो से ढाई लाख सैलानी पहुंचते थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते गॉर्डन में सभी गतिविधियां ठप हैं। इस बार गार्डन विदेशी प्रजाति के सेब और अन्य फलों से लदा पड़ा है। रानीखेत हिल स्टेशन पर्यटन नगरी के रूप में प्रसिद्ध है। 1869 में जब अंग्रेजों ने यहां छावनी बसाई, यहां की आबो हवा उन्हें इतनी पसंद आई कि अंग्रेजों ने रानीखेत को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की भी थान ली थी। इसके बाद देश आजाद हो गया।आजादी के बाद रानीखेत के पर्यटन विकास की मुहिम शुरू हुई। यहां का गोल्फ मैदान गुलमर्ग के बाद एशिया का सबसे बड़ा नेचुरल मैदान है। यहां भी भारी संख्या में पर्यटक आते हैं। 1952 में पहाड़ के औद्योगिक विकास के लिए रानीखेत के चौबटिया में उद्यान निदेशालय स्थापित किया गया। सेब गार्डन स्थापित किया गया। जिसमें स्वदेशी प्रजाति के सेब के पेड़ लदे रहते थे, इससे पर्यटन विकास को भी बल मिला। यहां हर साल भारी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं। लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन के कारण पर्यटन व्यवसाय पर भारी मार पड़ी है। चौबटिया गार्डन में हर साल दो से ढाई लाख पर्यटक घूमने आते हैं। गार्डन में इन दिनों विदेशी प्रजाति के सेब के पेड़ लदे हुए हैं। वहीं बादाम, प्लम, खुबानी व नाशपाती के पौधों की नर्सरी तैयार की जा रही है। उद्यान अधीक्षक डॉ ब्रजेश कुमार गुप्ता ने बताया कि सेब व अन्य फलों के पेड़ों के संरक्षण का कार्य चल रहा है। हाइडेंसीटी प्लांट तैयार किया गया है जिसमें विदेशी प्रजाति अम्बरी, टॉप रेड, सिल्वर स्पर सेब व चेरी, बादाम, खुबानी के पौधे रोपित किये गए हैं। लॉक डाउन का खासा असर पड़ा है।
--::: गाइड भी हुए बेरोजगार: रानीखेत। पर्यटन व्यवसाय से ही गाइडों की रोजी रोटी भी जुड़ी हुई है। अब लॉकडाउन होने के कारण गाइडों पर भी रोजी रोटी का संकट गहरा गया है। जिससे गाइड भी बेहद निराश हैं। गाइड पर्यटकों को गार्डन घुमाकर रोजी रोटी कम लेते थे। गाइडों का कहना है कि दो माह से आर्थिक हालात खराब हो चले हैं।