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पीसी तिवारी बोले, प्राकृतिक संसाधनों की लूट का परिणाम है चमोली आपदा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 18 Feb 2021 11:41 PM IST
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Chamoli disaster is the result of plunder of natural resources, PC Tiwari said
अल्मोड़ा में पत्रकारों से वार्ता करते उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवा? - फोटो : ALMORA
अल्मोड़ा। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि चमोली जिले के रणी गांव में आई आपदा प्राकृतिक नहीं है। यह राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की लूट का परिणाम है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। साथ ही इस मामले की न्यायिक समीक्षा भी की जानी चाहिए।
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आपदा प्रभावित गांवों का भ्रमण कर लौटे पीसी तिवारी ने पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र और बड़े बांधों के निर्माण से जुड़ीं कंपनियां मुनाफा कमाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। सरकार अब इसे ग्लेशियर टूटने से हुई प्राकृतिक आपदा बताकर जिम्मेदारी से बचना चाह रही है। धौलीगंगा और ऋषिगंगा में चेतावनी के लिए कोई अलार्म सिस्टम नहीं था और न ही मजदूरों की सुरक्षा के कोई इंतजाम थे। आपदा में मारे गए लोगों की संख्या कम बताई जा रही है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कंपनी के अधिकारियों की इस मामले में भूमिका की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। निर्माण कार्य में लगे लापता हुए अधिकतर मजदूर बाहरी प्रदेशों के थे। लापता लोगों की ढूंढखोज में विभिन्न क्षेत्रों से परिजन पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं मिल रही है।
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उन्होंने कहा कि 2013 की आपदा के बाद भी सरकार नहीं चेती। सड़कों का मलबा नदियों में फेंका जा रहा है और हिमालय को बर्बाद करने की साजिश की जा रही है। विभिन्न क्षेत्रों में बने बड़े बांध पहाड़ की परिस्थितियों के प्रतिकूल हैं। इससे उत्तराखंड समेत पर्वतीय राज्यों और देश का विनाश होगा।

आपदा से करीब तीस गांव प्रभावित हुए हैं और वह दूसरे स्थानों पर विस्थापित करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आपदा प्रभावितों को तत्काल मुआवजा दे। साथ ही प्रभावित गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करे। राज्य में बड़े बांधों के निर्माणों पर रोक लगाई जाए। इस मौके पर आनंदी वर्मा, गोपाल राम, धीरेंद्र मोहन पंत, किरन आर्या आदि मौजूद थी।
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