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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Cashier's responsibility was handed over to IV class employee

चतुर्थ श्रेणी कर्मी को सौंप दी थी कैशियर की जिम्मेदारी

Fri, 04 Jan 2019 11:05 PM IST
Almora desk दीप जोशी  अल्मोड़ा।
दीप जोशी  अल्मोड़ा। Published by: Almora desk Updated Fri, 04 Jan 2019 11:05 PM IST
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जिला सहकारी बैंक लमगड़ा शाखा में हुए करीब 80 लाख के घोटाले में दिलचस्प तथ्य सामने आए हैं। यह घोटाला 2013 से लेकर 2017 के बीच हुआ और इन चार-पांच सालों में प्रबंधन तंत्र ने लमगड़ा शाखा में कैशियर पद की जिम्मेदारी वहां तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को सौंप रखी थी। प्रबंधन की इसी गलती को घोटाले की मुख्य वजह माना जा रहा है। मजे की बात यह भी है कि घोटाले में फंसे इसी चतुर्थ श्रेणीकर्मी को प्रबंधन ने अप्रैल 2017 में लिपिक पद पर पदोन्नत भी कर दिया। घोटाले के कई मामले सामने आने के बाद उसे फरवरी 2018 में निलंबित कर दिया गया था। पता चला है कि घोटाले में फंसे इस कर्मचारी ने कोर्ट पहुंचकर दलील दी है कि बैंक प्रबंधन ने आखिर चतुर्थ श्रेणी कर्मी होने के बावजूद उसे कैश की जिम्मेदारी क्यों सौंप दी।  
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जिला सहकारी बैंक की लमगड़ा शाखा में पिछले करीब चार-पांच सालों के भीतर दर्जनों बैंक ग्राहकों के खातों से करीब करीब 28 लाख रुपये की हेराफेरी की गई है। इसके अलावा, मोतियापाथर और चायखान प्राइमरी एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव सोसायटी की ओर से जमा की गई करीब 44 लाख रुपये की राशि भी हड़प ली गई। इस मामले में 12 दिसंबर को पूर्व कैशियर जीवन सिंह बिष्ट के अलावा पूर्व में शाखा प्रबंधक रह चुके संजय लोबियाल और ममता शैलेंद्र के खिलाफ लमगड़ा थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन इसके बाद हाल ही में करीब आठ लाख गबन के नए मामले सामने आने के बाद यह प्रकरण काफी गरमा गया है।
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उधर पता लगा है कि इस मामले में गिरफ्तारी की संभावना के बाद मुख्य आरोपी चतुर्थ श्रेणी कर्मी से कैशियर बना जीवन सिंह बिष्ट कोर्ट पहुंच गया है और उसने दलील दी है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मी होने के बावजूद बैंक प्रबंधन ने उसे कैशियर पद की जिम्मेदारी क्यों सौंप दी। कई बार शाखा प्रबंधकों के अवकाश में रहने पर शाखा प्रबंधक की जिम्मेदारी भी उस पर रहती थी, जबकि उसे कोई अनुभव नहीं था। हालांकि मामले में पुलिस और विभागीय जांच के बाद सही स्थिति सामने आएगी। इधर इस बारे में पूछे जाने पर बैंक के महाप्रबंधक विवेकानंद पांडे का कहना है कि मामले में जांच चल रही है और आरोपी जीवन सिंह बिष्ट को कैशियर पद की जिम्मेदारी सौंपे जाने और पदोन्नति आदि के संबंध में दस्तावेजों को देखकर ही स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। 
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प्रबंध तंत्र को क्या सचमुच कुछ पता नहीं था  
अल्मोड़ा। 80 लाख के इस घोटाले में बैंक प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बैंक में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जीवन सिंह बिष्ट से कई साल तक कैशियर का काम लिया जाता रहा। 2013 से लेकर 2018 तक हुए तमाम घोटालों में मुख्य रूप से इसी कर्मचारी की भूमिका मानी जा रही है, लेकिन 2017 में उसे लिपिक पद पर पदोन्नति दे दी गई। सवाल यह भी उठ रहा है कि मोतियापाथर और चायखान की समितियों से जुड़े दर्जनों काश्तकारों द्वारा फसली ऋण संबंधी खातों में समय-समय पर जमा किए गए 44 लाख का गबन हो जाने के बावजूद प्रबंध तंत्र को लंबे समय तक भनक क्यों नहीं लगी।   
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