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आखिरकार निबंधक के कैंप ऑफिस में ताले डालने पड़े
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Wed, 13 Jan 2016 10:54 PM IST
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आखिरकार प्रदेश के निबंधक सहकारी समितियां निदेशालय का देहरादून में स्थित कैंप कार्यालय हमेशा के लिए बंद हो गया है और वहां का सारा सामान तीन ट्रकों में लाद कर अल्मोड़ा पहुंचा दिया गया है। कैंप कार्यालय के बहाने निबंधक कार्यालय पिछले 15 साल से देहरादून में चल रहा था। बीते दिनों इस ऑफिस को तत्काल प्रभाव से बंद करने का शासनादेश जारी होने के बाद अब स्थार्यी कार्यालय के लिए अल्मोड़ा में भवन किराए पर ले लिया गया है और सारा सामान इस भवन में पहुंचा दिया गया है। नए ऑफिस में केबिन आदि तैयार किए जा रहे हैं और दो सप्ताह के भीतर राज्य का निबंधक कार्यालय स्थायी तौर पर अल्मोड़ा में काम करने लगेगा।
राज्य स्थापना के समय प्रदेश सरकार ने निबंधक सहकारी समितियां का निदेशालय अल्मोड़ा में स्थापित किया। इसका मकसद पर्वतीय क्षेत्र में गठित समितियों को मजबूत बनाना था। ताकि पर्वतीय क्षेत्र में सहकारिता को बढ़ावा मिल सके। सरकार की मंशा के खिलाफ निबंधक समेत अन्य उच्चाधिकारियों ने देहरादून में ही ठिकाना बना लिया। अधिकारियों ने बकायदा चार जुलाई 2007 को एक शासनादेश जारी करवाकर देहरादून में कैंप कार्यालय स्थापित कर दिया। कैंप कार्यालय के बहाने एक तरह से निदेशालय स्थायी तौर पर देहरादून में ही चल रहा था। जबकि अल्मोड़ा के जिला सहकारी कार्यालय भवन में निदेशालय नाममात्र का रह गया। यहां सिर्फ निबंधक का बोर्ड ही टंगा रह गया। यहां तैनात कार्मिकों आए दिन फाइलें लेकर देहरादून की दौड़ लगाते रहते थे। इस मामले को अमर उजाला पूर्व में कई बार प्रमुखता से प्रकाशित किया। कुछ समय पहले मुख्यमंत्री हरीश रावत के अल्मोड़ा आगमन पर यह मामला जोर शोर से उठा था। इस पर सरकार ने 19 दिसंबर 2015 को आदेश जारी आदेश में देहरादून स्थित निबंधक कार्यालय को तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी कर दिए। इसके बाद अधिकारियों को कैंप कार्यालय में ताले डालने पड़े। विभाग ने लोअर माल रोड में किराए पर भवन भी ले लिया है और वहां ऑफिस शिफ्टिंग की तैयारियां चल रही हैं। सहायक निबंधक नीरज बेलवाल ने बताया कि देहरादून से सामान अल्मोड़ा पहुंच चुका है।
राज्य स्थापना के समय प्रदेश सरकार ने निबंधक सहकारी समितियां का निदेशालय अल्मोड़ा में स्थापित किया। इसका मकसद पर्वतीय क्षेत्र में गठित समितियों को मजबूत बनाना था। ताकि पर्वतीय क्षेत्र में सहकारिता को बढ़ावा मिल सके। सरकार की मंशा के खिलाफ निबंधक समेत अन्य उच्चाधिकारियों ने देहरादून में ही ठिकाना बना लिया। अधिकारियों ने बकायदा चार जुलाई 2007 को एक शासनादेश जारी करवाकर देहरादून में कैंप कार्यालय स्थापित कर दिया। कैंप कार्यालय के बहाने एक तरह से निदेशालय स्थायी तौर पर देहरादून में ही चल रहा था। जबकि अल्मोड़ा के जिला सहकारी कार्यालय भवन में निदेशालय नाममात्र का रह गया। यहां सिर्फ निबंधक का बोर्ड ही टंगा रह गया। यहां तैनात कार्मिकों आए दिन फाइलें लेकर देहरादून की दौड़ लगाते रहते थे। इस मामले को अमर उजाला पूर्व में कई बार प्रमुखता से प्रकाशित किया। कुछ समय पहले मुख्यमंत्री हरीश रावत के अल्मोड़ा आगमन पर यह मामला जोर शोर से उठा था। इस पर सरकार ने 19 दिसंबर 2015 को आदेश जारी आदेश में देहरादून स्थित निबंधक कार्यालय को तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी कर दिए। इसके बाद अधिकारियों को कैंप कार्यालय में ताले डालने पड़े। विभाग ने लोअर माल रोड में किराए पर भवन भी ले लिया है और वहां ऑफिस शिफ्टिंग की तैयारियां चल रही हैं। सहायक निबंधक नीरज बेलवाल ने बताया कि देहरादून से सामान अल्मोड़ा पहुंच चुका है।
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