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जल गए घर और जंगल: चली गई दस लोगों की जान, पैसे जारी करने में देरी खोल रही सरकारी तंत्र की लापरवाही की पोल

Wed, 26 Jun 2024 11:04 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा
अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 26 Jun 2024 11:04 AM IST
सार

फॉयर वॉचरों के मानदेय, पिरूल एकत्र करने और कंट्रोल बर्निंग के लिए विभाग को फायर सीजन खत्म होने के बाद मिला 26 लाख रुपये का बजट सरकारी तंत्र की लापरवाही की पोल खोलने के साथ ही कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है।

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Budget released for control burning of forests burnt by forest fire in almora
जंगल की आग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अल्मोड़ा जिले में वनाग्नि ने सबसे अधिक कहर बरपाया। 287 हेक्टेयर से अधिक जंगल जल गए और 10 लोगों को जंगल की आग में जान गंवानी पड़ी। हैरानी है कि फॉयर सीजन खत्म हो गया, जंगल और कई घर वनाग्नि से उजड़ गए तब जाकर वन विभाग को कंट्रोल बर्निंग के बजट मिला है। फॉयर वॉचरों के मानदेय, पिरूल एकत्र करने और कंट्रोल बर्निंग के लिए विभाग को फायर सीजन खत्म होने के बाद मिला 26 लाख रुपये का बजट सरकारी तंत्र की लापरवाही की पोल खोलने के साथ ही कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है।

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15 फरवरी से शुरू हुए फायर सीजन के बाद जिले में वनाग्नि ने खूब तांडव मचाया। अब तक 160 घटनाओं में 287 हेक्टेयर जंगल जलकर उजड़ गया। वनाग्नि की चपेट में आने से चार वन कर्मी सहित नौ लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई जबकि बुरी तरह झुलसे एक वन कर्मी को दिल्ली एम्स में उपचार के दौरान काल के गाल में समाना पड़ा। जब जंगल सुलग रहे थे और वनाग्नि की चपेट में आने से लोगों की मौत हो रही थी तब बजट की कमी से विभाग लाचार था। जब वनाग्नि से जंगल जल गए और कई परिवार उजड़ गए तो विभाग को कंट्रोल बर्निंग के साथ ही फॉयर वाचरों के मानदेय और पिरूल एकत्र करने के लिए भारी भरकम बजट जारी किया गया है।

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वन विभाग के मुताबिक इन कामों के लिए बीते 19 जून को 15 जबकि 20 जून को 11 लाख रुपये का बजट मिला है। इधर समय पर बजट मिलता और कंट्रोल बर्निंग के काम को समय रहते अंजाम तक पहुंचाया जाता तो शायद जंगलों के साथ ही प्रभावित परिवारों को उजड़ने से बचाया जा सकता था। 

फायर सीजन खत्म, अब ड्रेस के लिए मिला पैसा
जंगलों की आग बुझाने वाले फायर वॉचरों को फायर सीजन खत्म होने और बारिश शुरू होने के बाद जूता, लोअर और कमीज नसीब होगी। पूर्व में बगैर संसाधनों के ही वन कर्मी अपनी जान को खतरे में डालकर वनाग्नि से जूझते रहे। इस फायर सीजन में जरूरी उपकरणों के साथ ही वन कर्मियों के लिए सुरक्षा के जरूरी संसाधनों की कोई खरीद नहीं हुई। फायर सीजन खत्म होने के बाद फायर वॉचरों के लिए संसाधनों की खरीद के लिए मिला बजट कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है।

सात लाख रुपये का हुआ नुकसान
वन विभाग में इस फायर सीजन में जंगलों में आग की 160 घटनाएं दर्ज हुईं। 293.5 हेक्टेयर जंगल आग की भेंट चढ़ा। इस सीजन में वन विभाग को इन घटनाओं में 7,58,300 रुपये का नुकसान हुआ है।

फॉयर वॉचरों के मानदेय, उपकरणों की खरीद और कंट्रोल बर्निंग के लिए शासन से मांग की गई थी। बजट नहीं मिलने से फायर वॉचरों को मानदेय नहीं मिल सका। अब बजट जारी हो चुका है। जल्द फॉयर वॉचरों को मानदेय का भुगतान किया जाएगा। उनके लिए जरूरी संसाधनों की भी खरीद होगी।
-दीपक सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी, अल्मोड़ा।

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