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बीटीकेआईटी में बायोकमिकल इंजीनियरिंग में निरंतर घट रही छात्र संख्या
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द्वाराहाट का बीटीकेआईटी।
- फोटो : RANIKHET
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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। वर्ष 1986 में स्थापित बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं प्रौद्योगिकी संस्थान (बीटीकेआईटी) में चल रहे बायोकेमिकल इंजीनियरिंग ट्रेड में लगातार गिर रही छात्र संख्या से सभी आश्चर्यचकित हैं। इस ट्रेड से बीटेक करने के बाद विदेशों में तैनात इंजीनियरों ने भी इस पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि जैव रासायनिक इंजीनियरिंग के बारे में कम जानकारी होना इसका एक कारण है। बताया कि बायोकेमिकल इंजीनियरिंग अत्यधिक संवेदनशील और आवश्यक औद्योगिक प्रणाली की देखरेख करती है। इसको प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
दुनिया का भविष्य पर्यावरण विज्ञान और जैव रासायनिक इंजीनियरिंग पर निर्भर करता है। बायोकेमिकल इंजीनियरिंग खाद्य उद्योग, दवा उद्योग, जैवईंधन, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग से जुड़ा विषय है लेकिन किसी ने कभी भी बायोकेमिकल इंजीनियरिंग को प्रोत्साहित नहीं किया और न ही विशेष प्रणाली के इस आवश्यकता वाले ट्रेड को प्रचारित ही किया गया। यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया कनाडा में शोधछात्र विकास ने बताया कि, डॉ. अंकुर सिंह प्रसिद्ध वैज्ञानिक और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी यूएसए में प्रोफेसर हैं। डॉ. नितिन जोशी हार्वर्ड विश्वविद्यालय में व्याख्याता हैं। शैलेश खर्कवाल की अपनी फर्म है। उन्होंने जल उपचार में बहुत अच्छा काम किया है। मनोज कांडपाल, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर हैं। एक एसोसिएट प्रोफेसर हैं। इसी ट्रेड के कई लोग विदेशों में सेवारत हैं। देहरादून निवासी विकास ने 2014 में बीटीकेआईटी से बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के बाद आईआईटी गुवाहाटी से (एमटेक) मास्टर डिग्री ली। अब वह यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया कनाडा में शोधछात्र हैं। भारत सरकार से उन्हें करीब एक करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति भी मिलती है। इसके बावजूद कम छात्रसंख्या के कारण इस ट्रेड को बंद करने की नौबत आ रही है।
बायोकेमिकल इंजीनियरिंग का भविष्य उज्ज्वल, प्रचार-प्रसार की जरूरत
द्वाराहाट। देहरादून निवासी विकास ने बीटीकेआईटी में बायोकेमिकल इंजीनियरिंग में छात्रों की संख्या घटने पर चिंता जताई। वर्ष 2020 में इस ट्रेड में मात्र दो छात्र रहने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि, इस दयनीय स्थिति के लिए सभी जिम्मेदार हैं। बायोकेमिकल इंजीनियरिंग का बहुत उज्ज्वल भविष्य है। इसका प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए। संवाद
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पिछले 10 वर्षों में छात्र संख्या
द्वाराहाट इंजीनियरिंग कॉलेज में वर्ष 2000 से शुरू बायोकेमिकल इंजीनियरिंग ट्रेड में वर्ष 2009-10 तक कुल 30 सीटों के सापेक्ष 30 छात्रों ने प्रवेश लिया था। इसलिए वर्ष 10-11 से उक्त ट्रेड में सीटों की संख्या बढ़ाकर 60 कर दी गई। वर्ष 10 में 57, 11 में 46, 12 में 21, 13 में 21, 14 में 16, 15 में पांच, 16 में 12, 17 में सात, वर्ष 2018-2019 से मात्र दो-दो छात्रों ने प्रवेश लिया है। अब इस ट्रेड को बंद करने का प्रयास किया जा रहा है।
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दुनिया का भविष्य पर्यावरण विज्ञान और जैव रासायनिक इंजीनियरिंग पर निर्भर करता है। बायोकेमिकल इंजीनियरिंग खाद्य उद्योग, दवा उद्योग, जैवईंधन, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग से जुड़ा विषय है लेकिन किसी ने कभी भी बायोकेमिकल इंजीनियरिंग को प्रोत्साहित नहीं किया और न ही विशेष प्रणाली के इस आवश्यकता वाले ट्रेड को प्रचारित ही किया गया। यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया कनाडा में शोधछात्र विकास ने बताया कि, डॉ. अंकुर सिंह प्रसिद्ध वैज्ञानिक और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी यूएसए में प्रोफेसर हैं। डॉ. नितिन जोशी हार्वर्ड विश्वविद्यालय में व्याख्याता हैं। शैलेश खर्कवाल की अपनी फर्म है। उन्होंने जल उपचार में बहुत अच्छा काम किया है। मनोज कांडपाल, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर हैं। एक एसोसिएट प्रोफेसर हैं। इसी ट्रेड के कई लोग विदेशों में सेवारत हैं। देहरादून निवासी विकास ने 2014 में बीटीकेआईटी से बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के बाद आईआईटी गुवाहाटी से (एमटेक) मास्टर डिग्री ली। अब वह यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया कनाडा में शोधछात्र हैं। भारत सरकार से उन्हें करीब एक करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति भी मिलती है। इसके बावजूद कम छात्रसंख्या के कारण इस ट्रेड को बंद करने की नौबत आ रही है।
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बायोकेमिकल इंजीनियरिंग का भविष्य उज्ज्वल, प्रचार-प्रसार की जरूरत
द्वाराहाट। देहरादून निवासी विकास ने बीटीकेआईटी में बायोकेमिकल इंजीनियरिंग में छात्रों की संख्या घटने पर चिंता जताई। वर्ष 2020 में इस ट्रेड में मात्र दो छात्र रहने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि, इस दयनीय स्थिति के लिए सभी जिम्मेदार हैं। बायोकेमिकल इंजीनियरिंग का बहुत उज्ज्वल भविष्य है। इसका प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए। संवाद
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पिछले 10 वर्षों में छात्र संख्या
द्वाराहाट इंजीनियरिंग कॉलेज में वर्ष 2000 से शुरू बायोकेमिकल इंजीनियरिंग ट्रेड में वर्ष 2009-10 तक कुल 30 सीटों के सापेक्ष 30 छात्रों ने प्रवेश लिया था। इसलिए वर्ष 10-11 से उक्त ट्रेड में सीटों की संख्या बढ़ाकर 60 कर दी गई। वर्ष 10 में 57, 11 में 46, 12 में 21, 13 में 21, 14 में 16, 15 में पांच, 16 में 12, 17 में सात, वर्ष 2018-2019 से मात्र दो-दो छात्रों ने प्रवेश लिया है। अब इस ट्रेड को बंद करने का प्रयास किया जा रहा है।