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बिनसर वन्यजीव अभ्यारण्य में काटे तमाम पेड़
ब्यूरो/अमर उजाला, अल्मोड़ा।
Updated Tue, 17 Nov 2015 12:45 AM IST
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एक तरफ निर्माण पर रोक और वन अधिनियम के चलते बिनसर वन्य जीव विहार के आसपास के गांवों में बिजली की लाइन तक नहीं डाली जा सकी है दूसरी तरफ वन विभाग ने बिनसर वन्य जीव विहार के भीतर चीड़ के सैकड़ों हरे पेड़ गिराकर पानी एकत्र करने के लिए खाल (छोटा तालाब) का निर्माण शुरू कर दिया गया है।
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निर्माण कार्य के लिए वहां बकायदा जेसीबी का इस्तेमाल किया जा रहा है। सैकड़ों पेड़ काटने पर क्षेत्र के ग्रामीणों में रोष है। उन्होंने जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। मालूम हो कि वन अधिनियम के तहत अभ्यारण्य के भीतर पेड़ काटना तो दूर किसी भी तरह का निर्माण करना संभव नहीं है।
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इसी कारण आसपास के कई गांवों में आज तक बिजली की लाइन नहीं पहुंच सकी है। दूसरी तरफ वन विभाग ने बिनसर गेट से कुछ ही दूरी पर एक खाल (छोटा तालाब) बनाने के लिए चीड़ के सैकड़ों पेड़ गिरा दिए हैं। वहां बकायदा जेसीबी से कटान चल रहा है। भारी संख्या में पेड़ काटने की सूचना मिलने पर क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि अभ्यारण्य के इतनी संख्या में पेड़ गिराने की अनुमति केंद्र सरकार से ली जानी चाहिए थी। उन्होंने जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
ज्ञापन देने वालों में उत्तराखंड संसाधन पंचायत सुनोली के संयोजक ईश्वर जोशी, ग्राम प्रधान संगठन ताकुला के अध्यक्ष सुनील घाराकोटी, प्रधान राधा देवी, दीपक भाकुनी, बालम सिंह भाकुनी, रघुवर दत्त जोशी, मल्ला स्यूनरा विकास मंच के अध्यक्ष चंदन सिंह बिष्ट आदि शामिल हैं।
इधर जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया है कि फिलहाल ग्रामीणों का ज्ञापन उन्हें नहीं मिला है। ज्ञापन मिलने पर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।