डॉक्टरों के लिए बीडीसी सदस्य का बेमियादी आंदोलन शुरू
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरने की मांग को लेकर क्षेत्र पंचायत सदस्य नारायण सिंह अधिकारी का अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू हो गया है। स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से अधिकांश डॉक्टरों के पद रिक्त हैं, जिस कारण यह अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गया है, जबकि इससे पूरी तहसील के गांव जुड़े हुए हैं। आंदोलन को समर्थन देने के लिए विभिन्न दलों के लोग भी पहुंचे। इस संबंध में गत दिनों यहां पहुंचे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को ज्ञापन भी सौंपा गया था। आंदोलनकारी का कहना है कि ज्ञापन का उत्तर देना तक मुख्यमंत्री ने मुनासिब नहीं समझा।
आंदोलनकारियों का कहना है कि बार-बार मांग के बावजूद चिकित्सा के क्षेत्र में द्वाराहाट की उपेक्षा रुक नहीं रही है। यहां रेडियोलॉजिस्ट, हड्डी रोग, बाल रोग सहित चिकित्सकों के महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त हैं। मामूली बीमारी के उपचार के लिए भी लोगों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। वर्तमान में यहां मात्र तीन चिकित्सक हैं। असगोली के चिकित्सक डा. रवि शंकर प्रभारी का कार्य देख रहे हैं, जबकि एकमात्र स्थायी चिकित्सक के रूप में डा. बदरूल कमर हैं। कफड़ा से एक अन्य डॉक्टर को यहां अटैच किया गया है। आंदोलनकारी नारायण सिंह का कहना है कि शासन-प्रशासन पूरी तरह से उपेक्षा पर उतर आया है।
डॉक्टर नहीं होने से लोग परेशान हैं। बेमियादी आंदोलन स्वास्थ्य केंद्र प्रांगण में चल रहा है। समर्थन देने के लिए वहां प्रधान संगठन के अध्यक्ष महेश पंत, विरेंद्र बजेठा, विपिन पंत, नवीन मैनाली, आनंद पांडेय, राधा किरौला, दीपा मठपाल, हीरा अधिकारी, गोविंद अधिकारी, मनोज अधिकारी, नारायण रावत, प्रताप अधिकारी, दिवाकर कार्की, कैलाश भट्ट, हिम्मत सिंह सहित सौ से अधिक जनप्रतिनिधि और अन्य लोग मौजूद थे।