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एलएसी पर हुई झड़प से पूर्व सैनिक आक्रोशित कहा करारा जवाब दे भारत सरकार
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। लद्दाख के गलवां घाटी में सोमवार की रात एलएसी पर चीन और भारतीय सेना के बीच हुई झड़प के बाद पूर्व सैनिकों में भारी आक्रोश है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि भारत सरकार को अब चीन को माकूल जवाब देने का वक्त आ चुका है। दोपहर में तनाव दूर करने को लेकर बातचीत होती है और रात में हिंसक झड़प को अंजाम दिया गया। इस झड़प में भारतीय सेना के तीन जांबाज भी शहीद हुए हैं। इधर गुरिल्ला संगठन का कहना है कि उन्होंने गुरिल्ला युद्ध का प्रशिक्षण लिया हुआ है सरकार चाहे तो वह भी युद्ध में सहयोग करेंगे।
पूर्व सैनिकों में सोमवार की रात एलएसी पर हुई घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अब वक्त 1962 का नहीं है। अब भारतीय सेना भी सशक्त बन चुकी है, ऐसे में चीन पर दबाव बनाना बेहद जरूरी है। चीन हमेशा से ही छद्मम का सहारा लेता आया है। पूर्व सूबेदार हरी सिंह नेगी का कहना है कि कोरोना वायरस को लेकर चीन वैसे भी पूरे विश्व में अलग थलग पड़ा हुआ है। सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और 1962 के युद्ध का माकूल जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में चीन अलग थलग पड़ा हुआ है। यह सही वक्त है कि निर्णायक कदम उठाते हुए चीन द्वारा कब्जाई गई भूमि को भी वापस लेना चाहिए। इसके लिए पूर्व सैनिक भी युद्ध में सहयोग करेंगे। पूर्व सैनिक शंकर दत्त बुधोड़ी ने भी चीन को माकूल जवाब देने की पैरवी की है। कहा कि चीन गलत हरकतों से बाज आने वाला नहीं है। सरकार को अब जवाब देना होगा। चीन की चालबाजी में आने की भी जरूरत कतई नहीं है। गुरिल्ला संगठन के एनएस रावत ने कहा कि गुरिल्लाओं ने प्रशिक्षण लिया हुआ है। ऐसे में युद्ध में उनकी जरूरत पड़ी तो वह भी सहयोग करने को तैयार हैं।
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पूर्व सैनिकों में सोमवार की रात एलएसी पर हुई घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अब वक्त 1962 का नहीं है। अब भारतीय सेना भी सशक्त बन चुकी है, ऐसे में चीन पर दबाव बनाना बेहद जरूरी है। चीन हमेशा से ही छद्मम का सहारा लेता आया है। पूर्व सूबेदार हरी सिंह नेगी का कहना है कि कोरोना वायरस को लेकर चीन वैसे भी पूरे विश्व में अलग थलग पड़ा हुआ है। सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और 1962 के युद्ध का माकूल जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में चीन अलग थलग पड़ा हुआ है। यह सही वक्त है कि निर्णायक कदम उठाते हुए चीन द्वारा कब्जाई गई भूमि को भी वापस लेना चाहिए। इसके लिए पूर्व सैनिक भी युद्ध में सहयोग करेंगे। पूर्व सैनिक शंकर दत्त बुधोड़ी ने भी चीन को माकूल जवाब देने की पैरवी की है। कहा कि चीन गलत हरकतों से बाज आने वाला नहीं है। सरकार को अब जवाब देना होगा। चीन की चालबाजी में आने की भी जरूरत कतई नहीं है। गुरिल्ला संगठन के एनएस रावत ने कहा कि गुरिल्लाओं ने प्रशिक्षण लिया हुआ है। ऐसे में युद्ध में उनकी जरूरत पड़ी तो वह भी सहयोग करने को तैयार हैं।
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