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90 साल की उम्र भी नहीं तोड़ पाई आमा के हौसले     

Mon, 02 Oct 2017 10:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा Updated Mon, 02 Oct 2017 10:55 PM IST
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Amma's fame can not break even at 90 years of age
पिरुली देवी - फोटो : अमर उजाला

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 वृद्धावस्था में जहां व्यक्ति दूसरे के रहमोकरम पर जीने के लिए मजबूर हो जाता है, वहीं जैंती की परुली देवी (आमा) 90 साल की उम्र में भी अपना काम खुद कर लेती हैं। 22 साल की उम्र में पति और 60 के दशक में जवान बेटे को खो चुकीं परुली आमा आज एकाकी जीवन जीने को मजबूर हैं। 90 साल की उम्र में भी वह  पांच किमी दूर स्थित तहसील कार्यालय और बैंक पैदल ही आती-जाती हैं। खाना बनाने समेत सभी घरेलू कार्य स्वयं करती हैं। इसके अलावा घर के आसपास खेतों में सब्जी भी उगाती हैं। 
जैंती तहसील के मल्ला बिनौला गांव निवासी परुली देवी 90 साल हो गई हैं। वह स्वयं ही खाना बनाती हैं। कपड़े धोने समेत सभी घरेलू कार्य करती हैं। परुली देवी ने बताया कि पूर्व में पहाड़ों में भी बाल विवाह की प्रथा थी। महज 12 साल की उम्र में उनका विवाह मल्ला बिनौला निवासी बची राम के साथ हुआ। शादी के दस साल बाद ही पति बची राम की मृत्यु हो गई। 22  साल की उम्र में विधवा होने पर उन पर दुखों का पहाड़ टूट गया। पति की मौत के समय उनकी बेटी दो साल और बेटा एक साल का था। बच्चों की परवरिश के चलते आमा ने जीवन में कई कष्ट सहन किए। किसी तरह मजदूरी और खेती कर बच्चों का पालन पोषण किया और बच्चों को शिक्षा दिलाई। शिक्षा पूरी होने के बाद बेटे खीम राम की वन विभाग में नौकरी लग गई। उन्होंने बताया कि 60 के दशक में बेटी सरुली देवी और 70 के दशक में बेटे की शादी कर दी। बच्चों की शादी के बाद उनके जीवन में कुछ समय खुशी के पल आए, लेकिन ईश्वर को शायद यह मंजूर न था। 90 के दशक में बीमारी के कारण बेटे की मौत हो गई। पहले पति को खोने का गम था तो फिर जवान बेटे की मौत ने परुली देवी को झकझोर दिया।  
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उन्होंने बताया कि बेटे की मौत के बाद बहू हेमा देवी को मृतक आश्रित कोटे के तहत वन विभाग में नौकरी मिल गई। बहू अपने बच्चों के साथ पिछले 20 साल से लखनऊ में रहती है। उन्होंने बताया कि बहू कभी-कभी मिलने आती हैं। वृद्धावस्था में भी वह  पांच किमी दूर स्थित तहसील कार्यालय तथा वृद्धावस्था पेंशन लेने बैंक पैदल ही आती जाती हैं। 
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