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विभिन्न प्रकार के ऐपण और चौकी बनाने की बारीकियां बताई
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अल्मोड़ा में आयोजित ऐपण कार्यशाला में बनाए गए ऐपणों के साथ प्रतिभागी।
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। मोहन उप्रेती लोक संस्कृति कला, विज्ञान शोध समिति की ओर से आयोजित सात दिवसीय रचना दिवस महोत्सव का समापन हो गया है। महोत्सव के तहत जीजीआईसी अल्मोड़ा में आयोजित ऐपण कार्यशाला में ऐपण कलाकार मीरा जोशी ने प्रतिभागियों को ऐपण बनाने के गुर सिखाए।
उन्होंने स्नान चौकी, पूजा स्थल के ऐपण, धूलिअर्घ्य की चौकी, वर चौकी, लक्ष्मी चौकी, सरस्वती चौकी आदि बनाने की विधि के बारे में बताया। साथ ही ऐपण में इस्तेमाल होने वाले प्रतीक चिह्न के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। समिति के हेमंत जोशी ने कहा कि ऐपण को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए मिलजुल कर प्रयास करने होंगे।
उन्होंने बताया कि मधुबनी पेंटिंग की तरह ही ऐपण कला को भी पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कला और कलाकारों के विकास के लिए राज्य में ललित कला अकादमी और संगीत नाटक अकादमी की स्थापना की जानी चाहिए। सचिव कमल पांडे ने सभी का आभार जताया। संचालन युवा चित्रकार नमिता टम्टा ने किया। समापन पर रजनी जोशी, हर्षित तिवारी, एकता आर्य, आयुषी पांडेय, शीतल टम्टा, श्वेता सिंह आदि थे।
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उन्होंने स्नान चौकी, पूजा स्थल के ऐपण, धूलिअर्घ्य की चौकी, वर चौकी, लक्ष्मी चौकी, सरस्वती चौकी आदि बनाने की विधि के बारे में बताया। साथ ही ऐपण में इस्तेमाल होने वाले प्रतीक चिह्न के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। समिति के हेमंत जोशी ने कहा कि ऐपण को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए मिलजुल कर प्रयास करने होंगे।
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उन्होंने बताया कि मधुबनी पेंटिंग की तरह ही ऐपण कला को भी पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कला और कलाकारों के विकास के लिए राज्य में ललित कला अकादमी और संगीत नाटक अकादमी की स्थापना की जानी चाहिए। सचिव कमल पांडे ने सभी का आभार जताया। संचालन युवा चित्रकार नमिता टम्टा ने किया। समापन पर रजनी जोशी, हर्षित तिवारी, एकता आर्य, आयुषी पांडेय, शीतल टम्टा, श्वेता सिंह आदि थे।
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