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चिन्हीकरण के लिए 14 साल भी पड़ रहे कम

Fri, 23 May 2014 05:33 AM IST
Almora
Almora Updated Fri, 23 May 2014 05:33 AM IST
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अल्मोड़ा। अलग उत्तराखंड राज्य बने 14 साल बीतने को हैं, लेकिन आज तक राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इस मुद्दे को राज्य आंदोलनकारी समय-समय पर उठाते रहते हैं, लेकिन इसके बावजूद कई वास्तविक आंदोलनकारियों को राज्य आंदोलनकारी होने का प्रमाणपत्र नहीं मिला है।
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अलग उत्तराखंड बनने के बाद प्रदेश सरकार ने राज्य आंदोलन में सक्रियता से हिस्सा लेने वाले लोगों को आंदोलनकारी घोषित करने का निर्णय लिया था। जेल जाने और विभिन्न घटनाओं में घायल होने वाले आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरी में क्षैतिज आरक्षण अथवा पेंशन देने का निर्णय हुआ था। हालांकि क्षेतिज आरक्षण पर कोर्ट ने बाद में रोक लगा दी थी। सरकार के चिन्हीकरण के नियमों को लेकर आंदोलनकारियों में काफी नाराजगी रही है। आंदोलन में हिस्सा ले चुके कई लोगों का कहना है कि सरकार की अव्यवहारिक नीतियों के कारण कई वास्तविक आंदोलनकारियों का आज तक चिन्हीकरण नहीं हो सका है। जेल में रहने की शर्त के कारण वर्षों आंदोलन में सक्रिय रहे कई लोगों को प्रमाणपत्र नहीं मिल सका है। वहीं आज तक चिन्हीकरण की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है।
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अल्मोड़ा में 221 आंदोलनकारी चिन्हित : डीएम
अल्मोड़ा। जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन ने बताया कि अल्मोड़ा जिले में अब तक 221 आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण कर लिया गया है। जिला स्तर पर फिलहाल कोई आवेदन पत्र लंबित नहीं है। तहसील स्तर पर जो आवेदन लंबित हैं उन्हें शीघ्र जिला मुख्यालय भेजने को कहा गया है ताकि इसमें किसी तरह का विलंब नहीं हो।
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कई आंदोलनकारियों ने नहीं किया आवेदन
अल्मोड़ा। राज्य आंदोलन सहित कई जनांदोलनों में हिस्सा ले चुके कई वरिष्ठ आंदोलनकारियों ने राज्य आंदोलन का प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए आवेदन नहीं किया है। उलोवा के केंद्रीय अध्यक्ष डा.शमशेर सिंह बिष्ट ने बताया कि खुद उन्होंने और उनके अलावा डा. शेखर पाठक, राजीव लोचन साह, जगत रौतेला आदि ने आंदोलनकारी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन नहीं किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन में हिस्सा लेने के बदले राज्य से कुछ पाने की इच्छा नहीं की थी। इसीलिए उन्होंने आवेदन नहीं किया।


कई वास्तविक आंदोलनकारियों को नहीं दिया प्रमाणपत्र
अल्मोड़ा। उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने बताया कि उन्होंने बीते दिनों आखिरी तिथि पर राज्य आंदोलनकारी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया है। श्री तिवारी ने कहा कि कार रैली का विरोध राज्य आंदोलन के लिए ही किया था। जिसमें वह खुद और कई अन्य लोग जेल गए थे। श्री तिवारी ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण कई वास्तविक आंदोलनकारियों का आज तक चिन्हीकरण नहीं हुआ है।
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