{"_id":"113-67168","slug":"Almora-67168-113","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहरों से पहले गांवों का हो विकास ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहरों से पहले गांवों का हो विकास
Almora
Updated Tue, 26 Nov 2013 05:46 AM IST
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड सेवा निधि में आयोजित प्रदेश स्तरीय विकास विमर्शशाला में ग्रामीण क्षेत्रों से आई महिलाओं ने कहा कि शहरों से पहले गांवों के विकास की बात होनी चाहिए। दूर दराज से आई महिलाओं ने गांवों की बदहाल स्थिति और कठिनाईयों के बारे में बताया।
महिला संगठनों से जुड़ी बेरीनाग से आई राधा खनका ने कहा कि आज गांवों की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। लोग बच्चों को पढ़ाने, इलाज आदि के लिए शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। जंगली जानवरों ने खेती चौपट कर दी है। शामा बागेश्वर से आई नंदी कोरंगा ने भी कहा कि शहरों से पहले गांवों का विकास किया जाना चाहिए। दन्यां से आई पुष्पा पुनेठा ने कहा कि महिलाएं गांवों में पिस रही हैं और उनके बच्चे भी अंधकार में हैं। चंपा बिष्ट ने कहा कि गांवों में चकबंदी होनी चाहिए। ऊखीमठ गढ़वाल से पहुंची सुलोचना पुष्पवाण ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि 16 जून को उनके पति समेत 17 लोग किमाणा से केदारनाथ गए थे उनका आज तक पता नहीं है।
कपकोट से आए उमेश जोशी ने कहा कि गांवों की विकास की सोच न तो राजनेताओं की है और न ही पढ़े लिखे लोगों की। गणाईगंगोली के बची सिंह ने कहा कि अब गांव वालों के पास अपने हक हकूक के लिए कोई अधिकार नहीं हैं। बागेश्वर के केदार सिंह कोरंगा ने कहा कि जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए उचित प्रयास होने चाहिए। उत्तराखंड सेवा निधि के निदेशक डा. ललित पांडे ने भी जंगली जानवरों और बंदरों के आतंक की बात उठाई। इस मौके पर मल्लिका विरदी, वसुधा पंत, केवल सती, यूसुफ तिवारी, पूरन चंद्र तिवारी, सभासद अशोक पांडे, प्रो.अरुण पंत, आनंद सिंह बगडवाल, चंद्रशेखर पांडे, डा.आरसी पंत, पीसी तिवारी, डा.एचसी पांडे, डा.रमेश पांडे राजन आदि ने विचार रखे। अध्यक्षता प्रो.एचसी पांडे ने और संचालन डा. रमेश पांडे राजन ने किया। वरिष्ठ पत्रकार पीसी जोशी, पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी और डा. ललित पांडे ने सभी का आभार जताया।
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महिला संगठनों से जुड़ी बेरीनाग से आई राधा खनका ने कहा कि आज गांवों की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। लोग बच्चों को पढ़ाने, इलाज आदि के लिए शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। जंगली जानवरों ने खेती चौपट कर दी है। शामा बागेश्वर से आई नंदी कोरंगा ने भी कहा कि शहरों से पहले गांवों का विकास किया जाना चाहिए। दन्यां से आई पुष्पा पुनेठा ने कहा कि महिलाएं गांवों में पिस रही हैं और उनके बच्चे भी अंधकार में हैं। चंपा बिष्ट ने कहा कि गांवों में चकबंदी होनी चाहिए। ऊखीमठ गढ़वाल से पहुंची सुलोचना पुष्पवाण ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि 16 जून को उनके पति समेत 17 लोग किमाणा से केदारनाथ गए थे उनका आज तक पता नहीं है।
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कपकोट से आए उमेश जोशी ने कहा कि गांवों की विकास की सोच न तो राजनेताओं की है और न ही पढ़े लिखे लोगों की। गणाईगंगोली के बची सिंह ने कहा कि अब गांव वालों के पास अपने हक हकूक के लिए कोई अधिकार नहीं हैं। बागेश्वर के केदार सिंह कोरंगा ने कहा कि जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए उचित प्रयास होने चाहिए। उत्तराखंड सेवा निधि के निदेशक डा. ललित पांडे ने भी जंगली जानवरों और बंदरों के आतंक की बात उठाई। इस मौके पर मल्लिका विरदी, वसुधा पंत, केवल सती, यूसुफ तिवारी, पूरन चंद्र तिवारी, सभासद अशोक पांडे, प्रो.अरुण पंत, आनंद सिंह बगडवाल, चंद्रशेखर पांडे, डा.आरसी पंत, पीसी तिवारी, डा.एचसी पांडे, डा.रमेश पांडे राजन आदि ने विचार रखे। अध्यक्षता प्रो.एचसी पांडे ने और संचालन डा. रमेश पांडे राजन ने किया। वरिष्ठ पत्रकार पीसी जोशी, पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी और डा. ललित पांडे ने सभी का आभार जताया।
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