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शादी के पहले दिन मस्थगोई भेजने की परंपरा भी तोड़ रही दम
Almora
Updated Sun, 24 Nov 2013 05:45 AM IST
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चौखुटिया। नए जमाने की शादियों में तेजी से बदलाव आ रहा है। पहले जमाने में मस्थगोई (संदेश वाहक) शादी की तिथि से पहले दिन दुल्हन के घर जाकर दूल्हा पक्ष को बारातियों की संख्या आदि के बारे में सूचना देते थे। यह परंपरा अब समाप्ति की ओर है।
शादी में मस्थगोई (संदेश वाहक) की अहम भूमिका होती थी। मस्थगोई को कुछ क्षेत्रों में ममचहोई भी कहते थे। मस्थगोई पीले कपडे़ में एक तरफ उड़द और दूसरी तरफ गुड़ की भेली की पोटली बनाकर दुल्हन के घर एक दिन पहले चला जाता था। वह बारातियों की संख्या आदि की जानकारी दुल्हन पक्ष को देता था। फिर शादी के दिन वह बारात के आने वाले रास्ते में कुछ दूर जाकर बारातियों को दुल्हन के घर हो रही व्यवस्थाओं के बारे में अवगत कराता था।
दुल्हन के घर मस्थगोई का बड़ा सम्मान होता था। उसके आने से पहले घर की सीढ़ियों में पानी के गिलास अथवा लोटे में पानी भरकर रखा जाता था। वह पानी से भरे बर्तनों में पैसों के सिक्के डालता था। बच्चे बड़ी उत्सुकता से सिक्के निकाल लेते थे। आज मस्थगोई बारात के साथ ही महज औपचारिकता भर के लिए जाते हैं। दही से भरी और ऊपर से हरी सब्जियां रखी शगुनी ठेकी की जगह अब बाल्टियों ने ले ली है।
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शादी में मस्थगोई (संदेश वाहक) की अहम भूमिका होती थी। मस्थगोई को कुछ क्षेत्रों में ममचहोई भी कहते थे। मस्थगोई पीले कपडे़ में एक तरफ उड़द और दूसरी तरफ गुड़ की भेली की पोटली बनाकर दुल्हन के घर एक दिन पहले चला जाता था। वह बारातियों की संख्या आदि की जानकारी दुल्हन पक्ष को देता था। फिर शादी के दिन वह बारात के आने वाले रास्ते में कुछ दूर जाकर बारातियों को दुल्हन के घर हो रही व्यवस्थाओं के बारे में अवगत कराता था।
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दुल्हन के घर मस्थगोई का बड़ा सम्मान होता था। उसके आने से पहले घर की सीढ़ियों में पानी के गिलास अथवा लोटे में पानी भरकर रखा जाता था। वह पानी से भरे बर्तनों में पैसों के सिक्के डालता था। बच्चे बड़ी उत्सुकता से सिक्के निकाल लेते थे। आज मस्थगोई बारात के साथ ही महज औपचारिकता भर के लिए जाते हैं। दही से भरी और ऊपर से हरी सब्जियां रखी शगुनी ठेकी की जगह अब बाल्टियों ने ले ली है।
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