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जीआईएस उभरता नया वैज्ञानिक टूल : पांडे
Almora
Updated Thu, 21 Nov 2013 05:45 AM IST
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अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री के प्रमुख सलाहकार और पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे ने कहा है कि नियोजन के लिए भौगोलिक सूचना विज्ञान (जीआईएस) एक महत्वपूर्ण नया उभरता हुआ वैज्ञानिक टूल है। उत्तराखंड के टिकाऊ, समावेशी विकास और पारदर्शी व्यवस्था के लिए जीआईएस इंफास्ट्रक्चर विकसित करने की आवश्यकता है। श्री पांडे एसएसजे परिसर में विवि अनुदान आयोग के सहयोग से चल रहे जीआईएस और इसके अनुप्रयोग पुनश्चर्या कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जीआईएस से नियोजन के लिए जरूरी भौगोलिक सूचनाओं को डिजिटल मानचित्र के रूप में चंद सेकेंडों में प्राप्त किया जा सकता है। इसमें डिजिटल मानचित्रों, आंकड़ों के भंडारण की असीम क्षमता है। नियोजन को जिन सूचनाओं के निर्माण में सामान्यतया पांच वर्ष लगते हैं वह कार्य जीआईएस से कुछ मिनटों में संभव हो जाता है। आर्थिक, पर्यावरण, सामाजिक चुनौतियों, अनियंत्रित नगरीय विकास, पलायन, बेरोजगारी, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन में जीआईएस अत्यधिक मददगार तकनीक है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में कुमाऊं विवि के नेचुरल रिसोर्स डाटा मैनेजमेंट सिस्टम (एनआरडीएमएस) केंद्र जिलों का जीआईएस तैयार कर रहा है। केंद्र ने अल्मोड़ा, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, ऊधमसिंहनगर का जीआईएस तैयार कर लिया गया है। पौड़ी का निर्माणाधीन है।
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विशिष्ट अतिथि प्रशासनिक अकादमी संस्थान नैनीताल के सहायक निदेशक हिमांशु जोशी ने कहा कि शिक्षित, प्रशिक्षित, मानव संसाधनों की कमी के कारण नियोजन में जीआईएस का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है एनआरडीएमएस के निदेशक प्रो. जेएस रावत ने केंद्र के कार्यों पर प्रकाश डाला। डा. सुरेंद्र ठाकुर ने सभी का आभार जताया। इस मौके पर डा. ज्योति जोशी, डा. गीता रावत, डा. दीपक, मनीष कुमार, नवनीत गहलौत, निर्मला नैलवाल, नरेश पंत, महेंद्र कन्नौजिया, नेहा रानी, लता बुधानी, बबीता, उमाशंकर नेगी, संजय कुमार, ओसामा तिवारी आदि मौजूद थे।
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उन्होंने कहा कि जीआईएस से नियोजन के लिए जरूरी भौगोलिक सूचनाओं को डिजिटल मानचित्र के रूप में चंद सेकेंडों में प्राप्त किया जा सकता है। इसमें डिजिटल मानचित्रों, आंकड़ों के भंडारण की असीम क्षमता है। नियोजन को जिन सूचनाओं के निर्माण में सामान्यतया पांच वर्ष लगते हैं वह कार्य जीआईएस से कुछ मिनटों में संभव हो जाता है। आर्थिक, पर्यावरण, सामाजिक चुनौतियों, अनियंत्रित नगरीय विकास, पलायन, बेरोजगारी, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन में जीआईएस अत्यधिक मददगार तकनीक है।
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उन्होंने बताया कि वर्तमान में कुमाऊं विवि के नेचुरल रिसोर्स डाटा मैनेजमेंट सिस्टम (एनआरडीएमएस) केंद्र जिलों का जीआईएस तैयार कर रहा है। केंद्र ने अल्मोड़ा, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, ऊधमसिंहनगर का जीआईएस तैयार कर लिया गया है। पौड़ी का निर्माणाधीन है।
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विशिष्ट अतिथि प्रशासनिक अकादमी संस्थान नैनीताल के सहायक निदेशक हिमांशु जोशी ने कहा कि शिक्षित, प्रशिक्षित, मानव संसाधनों की कमी के कारण नियोजन में जीआईएस का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है एनआरडीएमएस के निदेशक प्रो. जेएस रावत ने केंद्र के कार्यों पर प्रकाश डाला। डा. सुरेंद्र ठाकुर ने सभी का आभार जताया। इस मौके पर डा. ज्योति जोशी, डा. गीता रावत, डा. दीपक, मनीष कुमार, नवनीत गहलौत, निर्मला नैलवाल, नरेश पंत, महेंद्र कन्नौजिया, नेहा रानी, लता बुधानी, बबीता, उमाशंकर नेगी, संजय कुमार, ओसामा तिवारी आदि मौजूद थे।