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केदारनाथ की त्रासदी से भी नहीं लिया सबक

Tue, 19 Nov 2013 05:45 AM IST
Almora
Almora Updated Tue, 19 Nov 2013 05:45 AM IST
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अल्मोड़ा। केदारनाथ जैसी त्रासदी के बाद भी हमारी सरकार ने कोई सबक नहीं लिया है और इन घटनाओं में प्रभावित हुए लोगों के लिए सरकार के नुमाइंदों में कोई संवेदनशीलता नहीं है। 18 सितंबर 2010 में आई आपदा में प्रभावित हुए लोगों के साथ हुए सलूक से इसका सबूत मिल जाता है। 2010 की आपदा में अल्मोड़ा में 29 लोग मारे गए थे। उसके बाद करीब एक दर्जन गांवों के 135 परिवारों को विस्थापित करने के लिए प्रशासन ने पुनर्वास की योजना बनाकर शासन को भेजी थी लेकिन हालत यह है कि तीन साल बाद भी इस योजना को मंजूरी नहीं मिली है और लोग खतरे वाले स्थानों में रहने को मजबूर हैं।
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सितंबर 2010 की आपदा में बाड़ी, देवली, पिलखा, जोश्याना गांवों में कुल 29 लोग मारे गए थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने 2011 में इन गांवों के अलावा भूस्खलन से संवेदनशील करीब एक दर्जन गांवों के 135 परिवारों को विस्थापित करने के लिए पुनर्वास की योजना बनाकर शासन को भेजी थी। पुनर्वास के लिए इन गांवों के आसपास ही भूमि का चयन किया गया था लेकिन पुनर्वास के लिए प्रशासन के प्रस्ताव को आज तक शासन से मंजूरी नहीं मिली है। जिससे प्रभावितों में आक्रोश है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी डा. मंजू पांडे ने बताया कि फिलहाल शासन से इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने का इंतजार किया जा रहा है। इधर, उपजिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने बताया कि शासन से निर्देश मिलने के बाद पुनर्वास की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिकांश परिवार फिलहाल अपने मूल घरों में ही निवास कर रहे हैं।
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