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बंदरों के आतंक से नगरवासियों को नहीं मिल रही निजात
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अल्मोड़ा। नगर क्षेत्र में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। बंदर अब तक कई लोगों को काट कर घायल भी कर चुके हैं, लेकिन बंदरों से निजात दिलाने के लिए अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर बंदरों के बधियाकरण की कार्रवाई शुरू करने की मांग की है।
अल्मोड़ा नगर के विभिन्न मोहल्लों में बंदरों का आतंक बना हुआ है। खासकर रानीधारा, ढ़ूंगाधारा, पूर्वी पोखरखाली, पश्चिमी पोखरखाली, थाना बाजार, गंगोला मोहल्ला, कचहरी बाजार समेत अन्य क्षेत्रों में कटखने बंदरों के आतंक से लोग काफी परेशान हैं। बंदर आए दिन खासकर बच्चों और वृद्धों को काटते रहते हैं। सरकार और जिला प्रशासन द्वारा बंदरों पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे लोगों में रोष है।
पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने बताया कि प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव प्रतिपालक उत्तराखंड ने अवगत कराया है कि बंदरों के बधियाकरण के लिए 50 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस धनराशि में से 22 लाख रुपये के उपकरण क्रय किए गए हैं और बंदरों के बधियाकरण की कार्रवाई की जानी है। उन्होंने जिलाधिकारी से बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए प्राथमिकता से ठोस कार्रवाई करने की मांग की है।
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अल्मोड़ा नगर के विभिन्न मोहल्लों में बंदरों का आतंक बना हुआ है। खासकर रानीधारा, ढ़ूंगाधारा, पूर्वी पोखरखाली, पश्चिमी पोखरखाली, थाना बाजार, गंगोला मोहल्ला, कचहरी बाजार समेत अन्य क्षेत्रों में कटखने बंदरों के आतंक से लोग काफी परेशान हैं। बंदर आए दिन खासकर बच्चों और वृद्धों को काटते रहते हैं। सरकार और जिला प्रशासन द्वारा बंदरों पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे लोगों में रोष है।
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पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने बताया कि प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव प्रतिपालक उत्तराखंड ने अवगत कराया है कि बंदरों के बधियाकरण के लिए 50 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस धनराशि में से 22 लाख रुपये के उपकरण क्रय किए गए हैं और बंदरों के बधियाकरण की कार्रवाई की जानी है। उन्होंने जिलाधिकारी से बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए प्राथमिकता से ठोस कार्रवाई करने की मांग की है।
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