{"_id":"5cd85fadbdec220729255ccc","slug":"81557684141-almora-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"धूल-धुए के कण वायुमंडल में उड़कर त्वचा को पहुंचाते हैं नुकसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धूल-धुए के कण वायुमंडल में उड़कर त्वचा को पहुंचाते हैं नुकसान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अल्मोड़ा। आरोग्य गायत्री धाम में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने जंगलों में बढ़ रही आग की घटनाओं पर चिंता जताई। डा. जेसी दुर्गापाल ने कहा कि गर्मी तथा हवा में ज्यादा फैलती है, जिससे गर्म धूल-धुएं के कण वायुमंडल में उड़कर त्वचा, आंखों और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। कार्बन के कण पानी में मिलने से व्यक्ति को पीलिया, उल्टी दस्त जैसे रोगों होते हैं।
उन्होंने बताया कि त्वचा में कालापन के अलावा खुजली, एलर्जी जैसे रोग यहां तक कि कैंसर और दमा होने की अधिक संभावना रहती है। आंखों में लालिमा, खुजली, मोतियाबिंद भी होने की आशंका रहती है। बार-बार ठंडे पानी से आंखों को धोना चाहिए। सुबह जब धूल कार्बन के कण वायुमंडल में बैठ जाते हैं तब लंबी सांस ले। नंगे पैर ओसयुक्त दूब में चले। इससे आंखों और पैरों की जलन में लाभ मिलता है। बालम अधिकारी की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में भीम सिंह अधिकारी, जीसी जोशी, नासिर, सुंदर नाथ, मंजू जोशी, मंजू तिवारी, उमा पंत, रश्मि जोशी आदि मौजूद थे। ब्यूरो
उन्होंने बताया कि त्वचा में कालापन के अलावा खुजली, एलर्जी जैसे रोग यहां तक कि कैंसर और दमा होने की अधिक संभावना रहती है। आंखों में लालिमा, खुजली, मोतियाबिंद भी होने की आशंका रहती है। बार-बार ठंडे पानी से आंखों को धोना चाहिए। सुबह जब धूल कार्बन के कण वायुमंडल में बैठ जाते हैं तब लंबी सांस ले। नंगे पैर ओसयुक्त दूब में चले। इससे आंखों और पैरों की जलन में लाभ मिलता है। बालम अधिकारी की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में भीम सिंह अधिकारी, जीसी जोशी, नासिर, सुंदर नाथ, मंजू जोशी, मंजू तिवारी, उमा पंत, रश्मि जोशी आदि मौजूद थे। ब्यूरो
विज्ञापन