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श्रम विभाग में कर्मचारियों का टोटा, जिले में एक भी शाखा नहीं
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अल्मोड़ा। श्रमिकों को हर काम के लिए श्रम विभाग के जिला मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। श्रम विभाग में कर्मचारियों की भी कमी है। विभाग के अधिकारी किराए के वाहनों में जिले का दौरा करने को मजबूर हैं।
जिले में कुछ साल पहले तक श्रम परिवर्तन अधिकारी से ही काम चल रहा था। इस साल हालांकि सहायक श्रम आयुक्त ने चार्ज ले लिया, लेकिन इसके बावजूद विभाग में कर्मचारियों की कमी है।
वर्तमान में जिला मुख्यालय में मात्र एक बाबू है। चार कर्मचारियों के अलावा एक वाहन चालक की विभाग को जरूरत है। राज्य बनने के बाद से श्रम विभाग की जिले में कोई नई शाखा नहीं खुली है। श्रम परिवर्तन अधिकारी आशा पुरोहित ने बताया कि विभाग में कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए श्रम आयुक्त को पत्राचार कई बार किया जा चुका है। जिले में विभाग की कोई अन्य शाखा नहीं होने से वर्तमान में जिला मुख्यालय से ही सारा कार्य चल रहा है।
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श्रम विभाग में जिले में 13500 मजदूर पंजीकृत हैं। सभी मजदूरों को पंजीकरण के लिए जिला मुख्यालय आना पड़ता है। श्रम विभाग में इन मजदूरों को नए कार्ड बनवाने से लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी लेने भी जिला मुख्यालय की ओर ही दौड़ लगानी पड़ती है। अधिकारियों को साप्ताहिक बंदी से लेकर लेबर एक्ट की जांच, योजनाओं का लाभ दिलाने और मजदूरों की समस्याओं का निराकरण करना पड़ता है। ।
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जिले में कुछ साल पहले तक श्रम परिवर्तन अधिकारी से ही काम चल रहा था। इस साल हालांकि सहायक श्रम आयुक्त ने चार्ज ले लिया, लेकिन इसके बावजूद विभाग में कर्मचारियों की कमी है।
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वर्तमान में जिला मुख्यालय में मात्र एक बाबू है। चार कर्मचारियों के अलावा एक वाहन चालक की विभाग को जरूरत है। राज्य बनने के बाद से श्रम विभाग की जिले में कोई नई शाखा नहीं खुली है। श्रम परिवर्तन अधिकारी आशा पुरोहित ने बताया कि विभाग में कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए श्रम आयुक्त को पत्राचार कई बार किया जा चुका है। जिले में विभाग की कोई अन्य शाखा नहीं होने से वर्तमान में जिला मुख्यालय से ही सारा कार्य चल रहा है।
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श्रम विभाग में जिले में 13500 मजदूर पंजीकृत हैं। सभी मजदूरों को पंजीकरण के लिए जिला मुख्यालय आना पड़ता है। श्रम विभाग में इन मजदूरों को नए कार्ड बनवाने से लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी लेने भी जिला मुख्यालय की ओर ही दौड़ लगानी पड़ती है। अधिकारियों को साप्ताहिक बंदी से लेकर लेबर एक्ट की जांच, योजनाओं का लाभ दिलाने और मजदूरों की समस्याओं का निराकरण करना पड़ता है। ।