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‘केवल सरकारी नारा बनकर रह गया हिमालय दिवस’
Updated Sat, 09 Sep 2017 11:04 PM IST
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड लोक वाहिनी की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आज हिमालय को डुबाने की नहीं हिमालय को बचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिमालय दिवस सिर्फ सरकारी नारा बनकर रह गया है ।
उलोवा नेता डा. शमशेर सिंह बिष्ट ने बताया कि 1994 में टिहरी में हुई बैठक में पर्वतीय विकास के लिए गहन चर्चा हुई थी और तब हिमालय बचाओ समिति का गठन भी किया गया था। जिसका मुख्य उद्देश्य पर्वतीय विकास विषय पर अपने अनुभव बांटना और आपसी सहयोग से इन मुद्दों को उठाना था। जिसमें उलोवा भी शामिल रही, लेकिन राज्य बनने के बाद हिमालय दिवस केवल सरकारी नारा बनकर रह गया है और भारी भरकम बजट खर्च कर सरकारें केवल गोष्ठी करने भर से हिमालय बचाओ अभियान की इतिश्री कर रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज हिमालय से एक औपनिवेशिक क्षेत्र जैसा व्यवहार किया जाता है। दिल्ली और देहरादून से ही नीतियां तय कर ली जाती हैं। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर टिहरी बांध बनाया जिसमें विकास कम विनाश अधिक हुआ है और अब पंचेश्वर बांध बनाकर पूरे उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र को डुबोने का प्रयास किया जा रहा है। बैठक में जगत रौतेला, पूरन चंद्र तिवारी, जंग बहादुर थापा, हरीश मेहता, अनीसुद्दीन, रेवती बिष्ट, सुशीला धपोला मौजूद थे।
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उलोवा नेता डा. शमशेर सिंह बिष्ट ने बताया कि 1994 में टिहरी में हुई बैठक में पर्वतीय विकास के लिए गहन चर्चा हुई थी और तब हिमालय बचाओ समिति का गठन भी किया गया था। जिसका मुख्य उद्देश्य पर्वतीय विकास विषय पर अपने अनुभव बांटना और आपसी सहयोग से इन मुद्दों को उठाना था। जिसमें उलोवा भी शामिल रही, लेकिन राज्य बनने के बाद हिमालय दिवस केवल सरकारी नारा बनकर रह गया है और भारी भरकम बजट खर्च कर सरकारें केवल गोष्ठी करने भर से हिमालय बचाओ अभियान की इतिश्री कर रही हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि आज हिमालय से एक औपनिवेशिक क्षेत्र जैसा व्यवहार किया जाता है। दिल्ली और देहरादून से ही नीतियां तय कर ली जाती हैं। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर टिहरी बांध बनाया जिसमें विकास कम विनाश अधिक हुआ है और अब पंचेश्वर बांध बनाकर पूरे उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र को डुबोने का प्रयास किया जा रहा है। बैठक में जगत रौतेला, पूरन चंद्र तिवारी, जंग बहादुर थापा, हरीश मेहता, अनीसुद्दीन, रेवती बिष्ट, सुशीला धपोला मौजूद थे।
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