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पेयजल योजना से नहीं जुड़ने से सिमोली गांव के ग्रामीण नाराज
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। तहसील के सुदूरवर्ती सिमोली गांव को सिरोता नदी से बनी देवलीखान पेयजल योजना से जोड़ने की मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी है। योजना से गांव नहीं जुड़ा होने के कारण ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 150 परिवार दूरदराज के पारंपरिक पेयजल स्रोतों पर निर्भर हैं। योजना से गांव को जोड़ने की मांग को लेकर जिलाधिकारी से लेकर शासन तक पत्र भेजे गए, लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि उनका गांव सिमोली विकासखंड मुख्यालय से 70 किमी की दूरी पर है। 2007 में पास ही स्थित सिरोता नदी से देवलीखान पेयजल योजना नाम से योजना स्वीकृत हुई। पेयजल निर्माण निगम अल्मोड़ा द्वारा 2015 में निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, लेकिन सिमोली गांव को इस योजना से नहीं जोड़ा गया है। जबकि योजना बनाते समय 2007 में सिमोली ग्राम सभा में भी अधिकारियों के साथ बैठक हुई। तय हुआ था कि सिमोली को भी योजना से शामिल किया जाएगा। उपभोक्ता पेयजल एवं स्वच्छता समिति की रसीदें भी काटी गईं। कुल 13500 रुपये स्टेट बैंक की मजखाली शाखा में जमा कराए गए।
अब जब गांव को योजना से नहीं जुड़ने की सूचना मिली तो ग्रामीण लगातार पेयजल निर्माण इकाई के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन आश्वासनों के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हो रहा है। सरपंच डुंगर सिंह ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी नानीसार आगमन पर ज्ञापन सौंपा गया था।
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उन्होंने भी जिलाधिकारी को निर्देश दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों ने फिर से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर सार्थक कार्रवाई की अपील की है। इधर, पेयजल निगम निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता केडी भट्ट ने कहा कि इस मामले में शीघ्र ही मौके पर जाकर ग्रामीणों से वार्ता होगी।
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ग्रामीणों का कहना है कि उनका गांव सिमोली विकासखंड मुख्यालय से 70 किमी की दूरी पर है। 2007 में पास ही स्थित सिरोता नदी से देवलीखान पेयजल योजना नाम से योजना स्वीकृत हुई। पेयजल निर्माण निगम अल्मोड़ा द्वारा 2015 में निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, लेकिन सिमोली गांव को इस योजना से नहीं जोड़ा गया है। जबकि योजना बनाते समय 2007 में सिमोली ग्राम सभा में भी अधिकारियों के साथ बैठक हुई। तय हुआ था कि सिमोली को भी योजना से शामिल किया जाएगा। उपभोक्ता पेयजल एवं स्वच्छता समिति की रसीदें भी काटी गईं। कुल 13500 रुपये स्टेट बैंक की मजखाली शाखा में जमा कराए गए।
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अब जब गांव को योजना से नहीं जुड़ने की सूचना मिली तो ग्रामीण लगातार पेयजल निर्माण इकाई के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन आश्वासनों के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हो रहा है। सरपंच डुंगर सिंह ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी नानीसार आगमन पर ज्ञापन सौंपा गया था।
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उन्होंने भी जिलाधिकारी को निर्देश दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों ने फिर से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर सार्थक कार्रवाई की अपील की है। इधर, पेयजल निगम निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता केडी भट्ट ने कहा कि इस मामले में शीघ्र ही मौके पर जाकर ग्रामीणों से वार्ता होगी।