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चीन सीमा से लगी घाटियों की समस्याओं को समझेंगे पीएम मोदी
Updated Mon, 08 Oct 2018 11:29 PM IST
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अल्मोड़ा। रविवार को देहरादून पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कुमाऊं मंडल विकास निगम द्वारा प्रकाशित महत्वपूर्ण पुस्तक थ्रोन ऑफ द गॉड्स पुस्तक भेंट की। इस किताब में पिथौरागढ़ जिले की दारमा, व्यांस और चौंदास घाटी में रहने वाले लोगों के इतिहास के साथ ही सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं आदि का वर्णन है। यह माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री इस पुस्तक को पढ़कर चीन की सीमा से लगे इस क्षेत्र की संस्कृति, परंपराओं आदि के अलावा यहां की जटिल समस्याओं को गहराई से समझ सकेंगे।
इस क्षेत्र की परंपरा, संस्कृति और इतिहास आदि के बारे में गहरी समझ रखने वाले कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक धीराज गर्ब्याल ने वरिष्ठ साहित्यकार अशोक पांडे के सहयोग से करीब दो साल पहले इस किताब की रचना की। 278 पेज की इस किताब में दारमा, व्यांस और चौंदास तीनों घाटियों की सामाजिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थिति का वर्णन किया गया है। तीनों घाटियों में सदियों से चली आ रही परंपराओं, मिथ (लोकोक्तियों), खानपान, धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं को भी पुस्तक में रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
किताब में तीनों घाटियों में रहने वाली रं समाज की विभिन्न जातियों, उपजातियों और यहां की भौगोलिक और प्राकृतिक स्थिति, यहां की समस्याओं आदि का भी समावेश किया गया है। पुस्तक में मानवशास्त्र (एंथ्रॉपोलॉजी) की दृष्टि से भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं। यह माना जा रहा है कि रं समाज पर शोध करने वालों के लिए भी यह पुस्तक काफी महत्वपूर्ण साबित होगी।
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इस क्षेत्र की परंपरा, संस्कृति और इतिहास आदि के बारे में गहरी समझ रखने वाले कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक धीराज गर्ब्याल ने वरिष्ठ साहित्यकार अशोक पांडे के सहयोग से करीब दो साल पहले इस किताब की रचना की। 278 पेज की इस किताब में दारमा, व्यांस और चौंदास तीनों घाटियों की सामाजिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थिति का वर्णन किया गया है। तीनों घाटियों में सदियों से चली आ रही परंपराओं, मिथ (लोकोक्तियों), खानपान, धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं को भी पुस्तक में रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
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किताब में तीनों घाटियों में रहने वाली रं समाज की विभिन्न जातियों, उपजातियों और यहां की भौगोलिक और प्राकृतिक स्थिति, यहां की समस्याओं आदि का भी समावेश किया गया है। पुस्तक में मानवशास्त्र (एंथ्रॉपोलॉजी) की दृष्टि से भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं। यह माना जा रहा है कि रं समाज पर शोध करने वालों के लिए भी यह पुस्तक काफी महत्वपूर्ण साबित होगी।
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