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बंधियाकरण भी नहीं हैं लावारिश कुतों के आतंक से निजात दिलाने का स्थायी समाधान
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। बेशक पशु क्रूरता अधिनियम लावारिस कुत्तों के आतंक से लोगों को निजात दिलाने में बाधक बन रहा हो, लेकिन कुत्तों का बधियाकरण भी स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा है। कैंट क्षेत्र में ही दो बार लावारिस कुत्तों का बधियाकरण किया गया, इसके बाद भी कुत्तों की संख्या दिन बढ़ती जा रही है। लावारिस कुत्तों द्वारा एक पांच वर्षीय बालिका की जान लेने के बाद लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
दरअसल पूर्व में छावनी परिषद में कुत्तों के लिए पास सिस्टम लागू था। जिन कुत्तों के गले में पास नहीं होता था अथवा वह कुत्ते लावारिस और पागल हो जाते थे तो उन्हें गोली मार दी जाती थी। लेकिन बीते दो दशकों से यह प्रक्रिया बंद हो चुकी है। बताया जा रहा है कि पशु क्रूरता अधिनियम ने सभी के हाथ बांध दिए हैं। इस एक्ट के तहत अब तो पागल कुत्ते को भी नहीं मार जा सकता। उसे पकड़कर इंजेक्शन लगाने का प्रावधान है। अधिनियम बनने के बाद क्षेत्र में लावारिस कुत्तों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।
इस पर अंकुश लगाने के लिए छावनी परिषद द्वारा दो बार एनजीओ के माध्यम से कुत्तों का बधियाकरण कराया गया। सबसे पहले 2013 में अल्मोड़ा की एनजीओ की मदद से 206 कुत्तों का बधियाकरण कराया गया। इसके बाद दिसंबर 2017 में 106 कुत्तों का बधियाकरण हुआ। लेकिन हालात अब भी जस के तस हैं। गली मोहल्लों में कई कुत्तों के झुंड घूूम रहे हैं। 2016 में छावनी परिषद द्वारा 284 कुत्तों को एंटी स्केबीज ड्रग भी पिलाई गई। छावनी परिषद के स्वच्छता निरीक्षक एपी सिंह ने बेताया कि इस साल भी कुत्तों बधियाकरण के लिए अल्मोड़ा के एक एनजीओ से वार्ता चल रही है।
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दरअसल पूर्व में छावनी परिषद में कुत्तों के लिए पास सिस्टम लागू था। जिन कुत्तों के गले में पास नहीं होता था अथवा वह कुत्ते लावारिस और पागल हो जाते थे तो उन्हें गोली मार दी जाती थी। लेकिन बीते दो दशकों से यह प्रक्रिया बंद हो चुकी है। बताया जा रहा है कि पशु क्रूरता अधिनियम ने सभी के हाथ बांध दिए हैं। इस एक्ट के तहत अब तो पागल कुत्ते को भी नहीं मार जा सकता। उसे पकड़कर इंजेक्शन लगाने का प्रावधान है। अधिनियम बनने के बाद क्षेत्र में लावारिस कुत्तों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।
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इस पर अंकुश लगाने के लिए छावनी परिषद द्वारा दो बार एनजीओ के माध्यम से कुत्तों का बधियाकरण कराया गया। सबसे पहले 2013 में अल्मोड़ा की एनजीओ की मदद से 206 कुत्तों का बधियाकरण कराया गया। इसके बाद दिसंबर 2017 में 106 कुत्तों का बधियाकरण हुआ। लेकिन हालात अब भी जस के तस हैं। गली मोहल्लों में कई कुत्तों के झुंड घूूम रहे हैं। 2016 में छावनी परिषद द्वारा 284 कुत्तों को एंटी स्केबीज ड्रग भी पिलाई गई। छावनी परिषद के स्वच्छता निरीक्षक एपी सिंह ने बेताया कि इस साल भी कुत्तों बधियाकरण के लिए अल्मोड़ा के एक एनजीओ से वार्ता चल रही है।
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