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1889 पशुपालकों को चार साल से नहीं मिला मुआवजा
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अल्मोड़ा। वन्य जीवों द्वारा मारे गए मवेशियों के पशुपालकों को 2015 से मुआवजा नहीं मिला है। बजट की आस में वन विभाग शासन को लगातार पत्र व्यवहार कर रहा है। सिविल सोयम और अल्मोड़ा वन प्रभाग में 1889 पशुपालकों को चार साल से मुआवजा नहीं मिला है। पशुपालकों को भुगतान करने के लिए दोनों विभागों को लगभग दो करोड़ की धनराशि चाहिए। वहीं दूसरी ओर मुआवजे की राशि के लिए पशुपालकों का वन विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटना मजबूरी बन गई है।
सिविल सोयम में पशु क्षति के 2015 से अब तक 889 मामले लंबित हैं। विभाग को 2015 से पहले 42 लाख रुपये बजट मिला था जिसमें से 36 लाख अभी भी विभाग के पास शेष है। यह राशि पशुपालकों को अब तक नहीं बांटने के बारे में भी विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तीन सदस्यीय जांच समिति द्वारा जांच की जा रही है। जिसके बाद करीब बची हुई धनराशि में से 55 पशुपालकों को मुआवजा दिया जाएगा। जबकि विभाग को एक करोड़ रुपये की और जरूरत है।
वहीं दूसरी ओर अल्मोड़ा वन प्रभाग में भी 2015 से करीब एक हजार पशुपालकों को मुआवजा नहीं मिला है। विभाग के पास भी पूर्व के बजट का लगभग 37 लाख रुपये बचा है। अल्मोड़ा वन प्रभाग के अधिकारियों का कहना है कि बची हुई राशि से यहां भी क्रमवार भुगतान की कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल अल्मोड़ा वन प्रभाग ने भी शासन से एक करोड़ रुपये बजट देने की मांग की है।
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सिविल सोयम में पशु क्षति के 2015 से अब तक 889 मामले लंबित हैं। विभाग को 2015 से पहले 42 लाख रुपये बजट मिला था जिसमें से 36 लाख अभी भी विभाग के पास शेष है। यह राशि पशुपालकों को अब तक नहीं बांटने के बारे में भी विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तीन सदस्यीय जांच समिति द्वारा जांच की जा रही है। जिसके बाद करीब बची हुई धनराशि में से 55 पशुपालकों को मुआवजा दिया जाएगा। जबकि विभाग को एक करोड़ रुपये की और जरूरत है।
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वहीं दूसरी ओर अल्मोड़ा वन प्रभाग में भी 2015 से करीब एक हजार पशुपालकों को मुआवजा नहीं मिला है। विभाग के पास भी पूर्व के बजट का लगभग 37 लाख रुपये बचा है। अल्मोड़ा वन प्रभाग के अधिकारियों का कहना है कि बची हुई राशि से यहां भी क्रमवार भुगतान की कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल अल्मोड़ा वन प्रभाग ने भी शासन से एक करोड़ रुपये बजट देने की मांग की है।
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