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खरीदार ना होने से खेतों में सड़ रहे घाटी के आम

Tue, 07 Aug 2018 11:53 PM IST
Updated Tue, 07 Aug 2018 11:53 PM IST
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खरीदार ना होने से खेतों में सड़ रहे घाटी के आम
चौखुटिया(अल्मोड़ा)। कभी सुअर और बंदरों से तो कभी मौसम की मार से जूझने वाले फल उत्पादक आमों के जबरदस्त उत्पादन के बावजूद खरीदार नहीं होने से परेशान हैं। हालत यह है कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं खेतों में पड़े आम सड़ रहे हैं तो कहीं आमों से लदे पेड़ों की तरफ कोई झांकने वाला नहीं है। काश्तकारों का कहना है कि यदि उनके गांव के लिए सड़क होती तो उनके फलों की यह दुर्गति नहीं होती।
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रसीले आमों की घाटी में इस बार आमों का जबरदस्त उत्पादन होने के बावजूद काश्तकार मायूस है, लेकिन सड़क से वंचित लालूरी, टिम्टा, कबडोली, कनोली, नगार्सीम जैसे दर्जनों गांवों में खरीदार के न होने से आम कहीं पेड़ों में लटका पड़ा है तो कहीं खेतों और गांव के रास्तों में पड़ा सड़ रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि गांव से सड़क तक ढूुलान आदि के महंगे खर्च के चलते कोई भी खरीदार गांव में आने को तैयार नहीं है। बाहरी मंडियों में गत वर्षों की तुलना में आम की कम कीमत होने से भी स्थानीय खरीदार और ठेकेदार सिर्फ सड़क से लगे गांवों तक ही पहुंच पाए हैं। जिसका असर दूरस्थ गांवों में साफ देखने को मिला है। बताते चलें की क्षेत्र में करीब एक हजार मीट्रिक टन से भी अधिक आम का उत्पादन होता है, परंतु मंडी तक सीधी पहुंच न होने से काश्तकारों को औने-पौने दामों में अपना आम ठेकेदारों को बेचना पड़ता है, लेकिन इस बार बाहरी ठेकेदारों के न पहुंचने से दूरस्थ गांवों के आम उत्पादकों का आम गांव में ही सड़ रहा है।
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बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में हो प्रयास
चौखुटिया(अल्मोड़ा)। आम उत्पादकों का कहना है कि एक ओर सरकार गांव से पलायन रोकने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की बात करती है। वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों द्वारा आम का जबरदस्त उत्पादन करने के बावजूद ना तो ग्राहक हैं ना बाजार। यदि उत्पादक अपने प्रयासों से आम बाहर भी ले जाना चाहें तो सड़क न होने से काफी दिक्कते हैं। लागत के अनुपात में दाम मिलना मुश्किल हैं।

गांव के लोग बताते हैं कि गत वर्षों तक आम की कीमत सही होने से बाहरी ठेकेदार भी गांव में पहुंचते थे परंतु इस बार उनके न पहुंचने से नुकसान हुआ है। ग्राम पंचायत लालूरी की आम उत्पादक लीला देवी, धर्मा देवी, सरस्वती, हरिदत्त और गीता देवी आदि का कहना है कि सरकार को उद्यान विभाग के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास करने चाहिए। इधर गांव की बुजुर्ग मोहनी आमा का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन मे आमों की इस तरह की दुर्दशा पहले कभी नही देखी।


लंबे समय से कर रहे सड़क की मांग
चौखुटिया(अल्मोड़ा)। लालूरी, टिम्टा, कनोली आदि ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने लंबे समय से स्वीकृत सड़क के निर्माण की मांग को लेकर गत दिनों तहसील घेराव, चक्काजाम भी किया था। अधिकारियों द्वारा शीघ्र टेंडर लगाने के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन वापस लिया था। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में सड़क होती तो उनके बगीचों में आम इस तरह बर्बाद नहीं होते।
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