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हर चुनाव में जिले के नाम पर छले जाते रहे रानीखेत के लोग
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। आजादी के बाद हुए हर चुनाव में पर्यटन नगरी के लोग अलग जिले के नाम पर छले गए हैं। राजनीतिक दलों के नुमाइंदों ने चुनावी भाषणों में इस मुद्दे पर वोट तो जमकर बटोरे, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अब इसे पर्यटन नगरी का दुर्भाग्य है कि घोषणा के आठ साल बाद भी जिला अस्तित्व में नहीं आया। परिणामस्वरूप रानीखेत अलग जिले की बाट जोह रहा है।
मालूम हो कि 1869 में यहां ब्रिटिश छावनी की स्थापना हुई। इसके बाद 1947 तक रानीखेत ब्रिटिश शासकों का महत्वपूूूूर्ण प्रशासनिक केंद्र था। यहां परगना मजिस्ट्रेट, सहायक आयुक्त और संयुक्त मजिस्ट्रेट तैनात रहे। आजादी के बाद यहां उद्यान निदेशालय खुला। 1962 के चीन युद्ध के बाद एसएसबी का सेक्टर मुख्यालय खुला। अब यह फ्रंटियर मुख्यालय के नाम से जाना जाता है।
रानीखेत में कुमाऊं,नागा एवं कुमाऊं स्काउट्स रेजीमेंट, छावनी परिषद कार्यालय भी है। कैंट क्षेत्र में भवन निर्माण, भूमि का वर्गीकरण, दाखिल-खारिज के कार्य आसानी से नहीं होते। तमाम समस्याओं के चलते आजादी के बाद से लोग रानीखेत को अलग जिला बनाने की मांग कर रहे हैं। 1985 में हुए जबरदस्त आंदोलन के बाद 1987 में यूपी सरकार की बैंकटरमानी समिति ने और 1989 में आठवें वित्त आयोग ने इसकी संस्तुति की, लेकिन जिला नहीं बन सका। 1995 में तत्कालीन यूपी सरकर ने यहां अपर जिलाधिकारी और पुलिस क्षेत्राधिकारी की भी नियुक्ति की।
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जिला तो दूर अपर जिलाधिकारी को यहां से हटा दिया गया। कई महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तर अन्यत्र शिफ्ट हो गए। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद चार नई तहसीलें बना दी गईं। जिले के लिए सभी आधारभूत ढांचा मौजूद होने के बावजूद हर चुनाव में यह मुद्दा प्रमुखता से उठता है, लेकिन जिले के नाम पर धेले भर की कार्रवाई भी नहीं की जाती।
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मालूम हो कि 1869 में यहां ब्रिटिश छावनी की स्थापना हुई। इसके बाद 1947 तक रानीखेत ब्रिटिश शासकों का महत्वपूूूूर्ण प्रशासनिक केंद्र था। यहां परगना मजिस्ट्रेट, सहायक आयुक्त और संयुक्त मजिस्ट्रेट तैनात रहे। आजादी के बाद यहां उद्यान निदेशालय खुला। 1962 के चीन युद्ध के बाद एसएसबी का सेक्टर मुख्यालय खुला। अब यह फ्रंटियर मुख्यालय के नाम से जाना जाता है।
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रानीखेत में कुमाऊं,नागा एवं कुमाऊं स्काउट्स रेजीमेंट, छावनी परिषद कार्यालय भी है। कैंट क्षेत्र में भवन निर्माण, भूमि का वर्गीकरण, दाखिल-खारिज के कार्य आसानी से नहीं होते। तमाम समस्याओं के चलते आजादी के बाद से लोग रानीखेत को अलग जिला बनाने की मांग कर रहे हैं। 1985 में हुए जबरदस्त आंदोलन के बाद 1987 में यूपी सरकार की बैंकटरमानी समिति ने और 1989 में आठवें वित्त आयोग ने इसकी संस्तुति की, लेकिन जिला नहीं बन सका। 1995 में तत्कालीन यूपी सरकर ने यहां अपर जिलाधिकारी और पुलिस क्षेत्राधिकारी की भी नियुक्ति की।
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जिला तो दूर अपर जिलाधिकारी को यहां से हटा दिया गया। कई महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तर अन्यत्र शिफ्ट हो गए। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद चार नई तहसीलें बना दी गईं। जिले के लिए सभी आधारभूत ढांचा मौजूद होने के बावजूद हर चुनाव में यह मुद्दा प्रमुखता से उठता है, लेकिन जिले के नाम पर धेले भर की कार्रवाई भी नहीं की जाती।