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एकमात्र वरिष्ठ निरीक्षक के जिम्मे बाट-माप विभाग
Updated Thu, 10 May 2018 10:52 PM IST
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अल्मोड़ा। जिले में बाट-माप विभाग के पास संसाधनों का अभाव बना हुआ है। बाट-माप का सत्यापन जिले में मात्र एक वरिष्ठ निरीक्षक और प्रयोगशाला परिचर के हवाले है। संसाधनों के अभाव में ऐसी स्थिति में जिले में घटतोली करने वाले व्यापारियों पर अंकुश नहीं लग पाता है।
जिले में हजारों की संख्या में दुकानें हैं। उपभोक्ताओं को दाम चुकाने के बाद पूरे वजन का सामान मिले, इसकी जिम्मेदारी बाट माप विभाग की है। इलेक्ट्रानिक तराजू वाले दुकानदारों को प्रतिवर्ष बाट-माप विभाग से सत्यापन कराना होता है, जबकि तराजू और बाट-माप रखने वाले दुकानदारों को दो वर्ष में एक बार तराजू और बाट का सत्यापन करवाना जरूरी होता है।
नगर समेत ग्रामीण इलाकों और कस्बों में कुल मिलाकर हजारों की संख्या में दुकानदार हैं, काफी संख्या में फड़ लगाकर भी व्यापारी कारोबार करते हैं, लेकिन बाट-माप विभाग के अनुसार अल्मोड़ा क्षेत्र में 1200 और रानीखेत क्षेत्र में 1600 दुकानदार हैं।
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जिले में अल्मोड़ा और रानीखेत में बाट-माप के कार्यालय हैं। अल्मोड़ा में वरिष्ठ निरीक्षक और प्रयोगशाला परिचर तैनात हैं, जबकि रानीखेत में निरीक्षक का पद रिक्त है। अल्मोड़ा की वरिष्ठ निरीक्षक के पास ही रानीखेत का भी कार्यभार है।
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जिले में हजारों की संख्या में दुकानें हैं। उपभोक्ताओं को दाम चुकाने के बाद पूरे वजन का सामान मिले, इसकी जिम्मेदारी बाट माप विभाग की है। इलेक्ट्रानिक तराजू वाले दुकानदारों को प्रतिवर्ष बाट-माप विभाग से सत्यापन कराना होता है, जबकि तराजू और बाट-माप रखने वाले दुकानदारों को दो वर्ष में एक बार तराजू और बाट का सत्यापन करवाना जरूरी होता है।
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नगर समेत ग्रामीण इलाकों और कस्बों में कुल मिलाकर हजारों की संख्या में दुकानदार हैं, काफी संख्या में फड़ लगाकर भी व्यापारी कारोबार करते हैं, लेकिन बाट-माप विभाग के अनुसार अल्मोड़ा क्षेत्र में 1200 और रानीखेत क्षेत्र में 1600 दुकानदार हैं।
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जिले में अल्मोड़ा और रानीखेत में बाट-माप के कार्यालय हैं। अल्मोड़ा में वरिष्ठ निरीक्षक और प्रयोगशाला परिचर तैनात हैं, जबकि रानीखेत में निरीक्षक का पद रिक्त है। अल्मोड़ा की वरिष्ठ निरीक्षक के पास ही रानीखेत का भी कार्यभार है।