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गुलार पेयजल योजना ध्वस्त, कई गांव पानी को तरसे
Updated Thu, 13 Jul 2017 11:03 PM IST
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मौलेखाल (अल्मोड़ा)। बीते दिनों हुई बारिश से सल्ट विकासखंड की सबसे बड़ी गुलार-करगेत पेयजल योजना ध्वस्त हो गई है। इस कारण क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों में तीन दिन से पानी की आपूर्ति ठप पड़ी है। ग्रामीण बारिश के पानी से काम चला रहे है। हैंडपंपों में सुबह से ही पानी लेने लोगों की भीड़ लग जा रही है। ग्रामीणों का पूरा दिन पानी जुटाने में ही बर्बाद हो रहा है। इसके बावजूद लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है।
गुलार-करगेत पेयजल योजना ध्वस्त होने के कारण जालीखान, कपराढैया, मौलेखाल, तहसील, शशिखाल, सकरखोला, पोखरी, ढैला, स्वास्थ्य केंद्र देवायल, हिनौला, करगेत, देवायल समेत एक दर्जन से अधिक गांवों में पिछले तीन दिनों से पानी नहीं आ रहा है। ग्रामीण एक किमी दूर स्थित प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर हैं। कई गांवों में पेयजल स्रोत तीन किमी से अधिक दूर है। इन गांवों के लोगों को पानी जुटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। सड़क किनारे स्थित हैंडपंपों में पानी लेने के लिए सुबह से ही लोगों की भीड़ लग जा रही है। घंटों इंतजार करने के बाद भी लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है।
ग्रामीण किसी तरह प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी लाकर काम चला रहे है। बारिश का पानी कपड़े धोने के साथ ही पशुओं के उपयोग में लाया जा रहा है। प्रधान संगठन के अध्यक्ष गोपाल रावत ने बताया कि पिछले तीन दिनों से एक दर्जन से अधिक गांवों में पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है। इस संबंध में जल संस्थान के अधिकारियों को सूचना दी गई हैं लेकिन अब तक पेयजल आपूर्ति सुचारू नहीं हुई है। उन्होंने पेयजल आपूर्ति शीघ्र सुचारू करने की मांग की।
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गुलार-करगेत पेयजल योजना ध्वस्त होने के कारण जालीखान, कपराढैया, मौलेखाल, तहसील, शशिखाल, सकरखोला, पोखरी, ढैला, स्वास्थ्य केंद्र देवायल, हिनौला, करगेत, देवायल समेत एक दर्जन से अधिक गांवों में पिछले तीन दिनों से पानी नहीं आ रहा है। ग्रामीण एक किमी दूर स्थित प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर हैं। कई गांवों में पेयजल स्रोत तीन किमी से अधिक दूर है। इन गांवों के लोगों को पानी जुटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। सड़क किनारे स्थित हैंडपंपों में पानी लेने के लिए सुबह से ही लोगों की भीड़ लग जा रही है। घंटों इंतजार करने के बाद भी लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है।
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ग्रामीण किसी तरह प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी लाकर काम चला रहे है। बारिश का पानी कपड़े धोने के साथ ही पशुओं के उपयोग में लाया जा रहा है। प्रधान संगठन के अध्यक्ष गोपाल रावत ने बताया कि पिछले तीन दिनों से एक दर्जन से अधिक गांवों में पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है। इस संबंध में जल संस्थान के अधिकारियों को सूचना दी गई हैं लेकिन अब तक पेयजल आपूर्ति सुचारू नहीं हुई है। उन्होंने पेयजल आपूर्ति शीघ्र सुचारू करने की मांग की।
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