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28 सिंचाई नहरें क्षतिग्रस्त, किसान परेशान
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अल्मोड़ा। गर्मी का सीजन शुरू हो गया है, लेकिन जिले में लंबे समय से क्षतिग्रस्त 28 सिंचाई नहरों को दुरुस्त नहीं किया जा सका है। इस कारण जिले में करीब छह सौ हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र में काश्तकारों को खेतों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जिससे किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सिंचाई विभाग के अल्मोड़ा डिवीजन में कुल 128 नहरें हैं। जिनमें से 100 चालू हालत में हैं, जबकि आपदा से 16 नहरें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। वहीं जल स्रोत सूखने से 12 नहरों का विभाग परित्याग कर चुका है। इन नहरों से कुल कुल 1618.20 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है है। सिंचाई नहरों के क्षतिग्रस्त होने से करीब 460 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई नहीं हो पा रही है।
रानीखेत खंड में सिंचाई विभाग के पास 87 नहरें हैं। इनमें से 67 नहरों से खेती की सिंचाई हो रही है। वहीं आठ नहरों का विभाग परित्याग कर चुका है, जबकि आपदा, सड़क निर्माण और अन्य कार्यों के चलते 12 नहरें क्षतिग्रस्त हैं। रानीखेत डिवीजन में 2853.4 हेक्टेयर भूमि में नहरों से सिंचाई होती है। नहरों के क्षतिग्रस्त होने से 127 हेक्टेयर भूमि में खेतों में सिंचाई के लिए पानी नहीं पहुंच पा रहा है। विभाग को क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत के लिए बजट नहीं मिला है, जिससे काश्तकारों की परेशानी बढ़ गई है।
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सिंचाई विभाग के अल्मोड़ा डिवीजन में कुल 128 नहरें हैं। जिनमें से 100 चालू हालत में हैं, जबकि आपदा से 16 नहरें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। वहीं जल स्रोत सूखने से 12 नहरों का विभाग परित्याग कर चुका है। इन नहरों से कुल कुल 1618.20 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है है। सिंचाई नहरों के क्षतिग्रस्त होने से करीब 460 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई नहीं हो पा रही है।
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रानीखेत खंड में सिंचाई विभाग के पास 87 नहरें हैं। इनमें से 67 नहरों से खेती की सिंचाई हो रही है। वहीं आठ नहरों का विभाग परित्याग कर चुका है, जबकि आपदा, सड़क निर्माण और अन्य कार्यों के चलते 12 नहरें क्षतिग्रस्त हैं। रानीखेत डिवीजन में 2853.4 हेक्टेयर भूमि में नहरों से सिंचाई होती है। नहरों के क्षतिग्रस्त होने से 127 हेक्टेयर भूमि में खेतों में सिंचाई के लिए पानी नहीं पहुंच पा रहा है। विभाग को क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत के लिए बजट नहीं मिला है, जिससे काश्तकारों की परेशानी बढ़ गई है।
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