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प्रवक्ताओं और एलटी शिक्षकों के 828 पद खाली
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अल्मोड़ा। चालू शिक्षा सत्र समाप्त होने को है और शीघ्र ही उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड की परीक्षाएं होने वाली हैं, लेकिन जिले के राजकीय इंटर कालेजों और हाईस्कूलों में 3049 प्रवक्ताओं और एलटी शिक्षकों में से 828 शिक्षकों के पद खाली हैं। इस कारण छात्र-छात्राओं खासकर बोर्ड परीक्षार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जिले में 145 राजकीय इंटर कालेज और 83 राजकीय हाईस्कूल हैं। इममें प्रवक्ता के 1333 पद सृजित हैं, परंतु इनमें से 715 पद ही भरे हुए हैं, जबकि 618 पद रिक्त हैं। वहीं एलटी संवर्ग में 1716 पदों में से 1506 पद पर ही शिक्षक तैनात हैं, 210 पद रिक्त हैं। खाली पदों में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, रसायन, भौतिकी, जीव विज्ञान, जंतु विज्ञान समेत महत्वपूर्ण शिक्षकों के पद शामिल हैं। इस कारण खासकर हाईस्कूल और इंटर बोर्ड परीक्षार्थियों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है।
दूसरी ओर 145 राजकीय इंटर कालेजों में से 66 में ही प्रधानाचार्य तैनात हैं, जबकि 79 जीआईसी मुखिया विहीन चल रहे हैं। राजकीय हाईस्कूलों में इससे भी बुरी स्थिति है। 83 राजकीय हाईस्कूलों में से 31 में ही प्रधानाध्यापक तैनात हैं, 52 हाईस्कूल प्रधानाध्यापक विहीन हैं। इससे विद्यालयों के अनुशासन समेत अन्य व्यवस्थाओं पर असर पड़ना स्वाभाविक है। सरकार और जनप्रतिनिधि शिक्षकों के तैनाती के दावे जरूर करते हैं, पर शिक्षकों की तैनाती करने में नाकाम ही रहे हैं।
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जिले में 145 राजकीय इंटर कालेज और 83 राजकीय हाईस्कूल हैं। इममें प्रवक्ता के 1333 पद सृजित हैं, परंतु इनमें से 715 पद ही भरे हुए हैं, जबकि 618 पद रिक्त हैं। वहीं एलटी संवर्ग में 1716 पदों में से 1506 पद पर ही शिक्षक तैनात हैं, 210 पद रिक्त हैं। खाली पदों में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, रसायन, भौतिकी, जीव विज्ञान, जंतु विज्ञान समेत महत्वपूर्ण शिक्षकों के पद शामिल हैं। इस कारण खासकर हाईस्कूल और इंटर बोर्ड परीक्षार्थियों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है।
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दूसरी ओर 145 राजकीय इंटर कालेजों में से 66 में ही प्रधानाचार्य तैनात हैं, जबकि 79 जीआईसी मुखिया विहीन चल रहे हैं। राजकीय हाईस्कूलों में इससे भी बुरी स्थिति है। 83 राजकीय हाईस्कूलों में से 31 में ही प्रधानाध्यापक तैनात हैं, 52 हाईस्कूल प्रधानाध्यापक विहीन हैं। इससे विद्यालयों के अनुशासन समेत अन्य व्यवस्थाओं पर असर पड़ना स्वाभाविक है। सरकार और जनप्रतिनिधि शिक्षकों के तैनाती के दावे जरूर करते हैं, पर शिक्षकों की तैनाती करने में नाकाम ही रहे हैं।
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