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चौकोटकि पारवती तीले धारो बोला...............
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। चौकोटैकि पारवती तीलै धारो बोला..., खोलि दे माता खोल भवानी धारमा किवाड़ा जैसे पारंपरिक झोड़ा गायन के साथ जैनोली का ऐतिहासिक चैतव म्यल (मेला) सैमधार मंदिर परिसर में संपन्न हो गया। म्यल में पारंपरिक बग्वाल तो अब औपचारिकता मात्र रह गया, लेकिन ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचे ग्रामीणों ने झोड़े और चांचरी गाकर धूम मचा दी। इससे पूर्व सुबह फूलदेयी का त्योहार मनाने के बाद ग्रामीण टोलियों के रूप में सेमधार मंदिर पहुंचे, यहां मंदिर की परिक्रमा भी की गई।
मालूम हो कि जैनोली में हर साल बैसाखी के दिन चैतव म्यल का आयोजन होता है। बताते हैं कि वर्षों पहले म्यल में क्षेत्र के फर्त्याल और माहरा जाति के लोगों में ओड़ा भेंटने को लेकर विवाद हो गया था, यह विवाद म्यल में बग्वाल के रूप में मनाया जाता था, लेकिन अब यह परंपरा औपचारिक मात्र रह गई है।
पिलखोली, जैनोली, जोग्याड़ी, शिलंगी, चमोली, तस्वाड़, खग्यार, डौनी, उपराड़ी, बजीना बजोल, टाना, पन्याली, डौरब, टूनाकोट, भड़गांव के ग्रामीण नगाड़े-निशानों के साथ झोड़ा गाते हुए सुबह मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। इसके बाद झोड़ा गायन का सिलसिला चला। इससे पूर्व सुबह के समय शिलंगी गांव में माहरा और फर्त्याल लोगों के बीच औपचारिक रूप से बग्वाल खेली गई।
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मोहन फर्त्याल, सौरव फर्त्याल, कृपाल जीना, गोपाल सिंह फर्त्याल, हरीश फर्त्याल, कुबेर फर्त्याल, भुवन बिष्ट, रतन फर्त्याल, सुरेश फर्त्याल, अंबादत्त पंत, गोपाल, बचे सिंह फर्त्याल, शेर सिंह फर्त्याल, कृपाल माहरा, हरीश माहरा सहित तमाम लोगों ने सहयोग किया।
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मालूम हो कि जैनोली में हर साल बैसाखी के दिन चैतव म्यल का आयोजन होता है। बताते हैं कि वर्षों पहले म्यल में क्षेत्र के फर्त्याल और माहरा जाति के लोगों में ओड़ा भेंटने को लेकर विवाद हो गया था, यह विवाद म्यल में बग्वाल के रूप में मनाया जाता था, लेकिन अब यह परंपरा औपचारिक मात्र रह गई है।
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पिलखोली, जैनोली, जोग्याड़ी, शिलंगी, चमोली, तस्वाड़, खग्यार, डौनी, उपराड़ी, बजीना बजोल, टाना, पन्याली, डौरब, टूनाकोट, भड़गांव के ग्रामीण नगाड़े-निशानों के साथ झोड़ा गाते हुए सुबह मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। इसके बाद झोड़ा गायन का सिलसिला चला। इससे पूर्व सुबह के समय शिलंगी गांव में माहरा और फर्त्याल लोगों के बीच औपचारिक रूप से बग्वाल खेली गई।
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मोहन फर्त्याल, सौरव फर्त्याल, कृपाल जीना, गोपाल सिंह फर्त्याल, हरीश फर्त्याल, कुबेर फर्त्याल, भुवन बिष्ट, रतन फर्त्याल, सुरेश फर्त्याल, अंबादत्त पंत, गोपाल, बचे सिंह फर्त्याल, शेर सिंह फर्त्याल, कृपाल माहरा, हरीश माहरा सहित तमाम लोगों ने सहयोग किया।