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समय से पहले फल आने पर हो रहा शोध
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। शिलांग (मेघालय) की काफल प्रजाति को यहां उगाने का सफल प्रयोग और महत्वपूर्ण फर्न प्रजातियों को एक स्थान पर विकसित करने के बाद अब अनुसंधान वन क्षेत्र कालिका की ओर से मौसम परिवर्तन के कारण कई प्रजातियों में समय से पहले आ रहे पुष्प और फल विषय पर शोध किया जा रहा है। इसके लिए हिसालू प्रजाति को चयनित किया गया है। कालिका वन क्षेत्र के तीन से चार किमी एरिया को इसके लिए चयनित किया गया है। प्रयोग में पांच साल का समय लगेगा।
बता दें कि अनुसंधान वन क्षेत्र कालिका की तरफ से इससे पूर्व फर्न की नर्सरी विकसित की है, मेघालय के काफल प्रजाति को यहां उगाने का सफल प्रयोग किया गया था। अब अनुसंधान केंद्र क्लाइमेट चेंज (मौसम परिवर्तन से होने वाले प्रभावों) पर एक नया प्रयोग करने जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि पिछले पांच छह वर्षों से उत्तराखंड के मध्य हिमालय क्षेत्रों में कुछ प्रजातियों में समय से पहली ही पुष्प और फल आ रहे हैं। जिसमें बुरांश, किल्मोड़ा और हिसालू प्रजातियां प्रमुख हैं। प्रयोग के लिए वन क्षेत्र द्वारा हिसालू प्रजाति का चयन किया गया है।
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हिसालू एक झाड़ीनुमा पौधा है, जिसका वानस्पतिक नाम रूबस एलीपटिक्स है जो भूमि संरक्षण के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण प्रजाति है। इसके फल मीठे तथा औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। प्रयोग के लिए कालिका क्षेत्र की तीन चार किमी की एरिया को चयनित किया गया है। यहां प्रचुर मात्रा में हिसालू की पौध उपलब्ध है।
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बता दें कि अनुसंधान वन क्षेत्र कालिका की तरफ से इससे पूर्व फर्न की नर्सरी विकसित की है, मेघालय के काफल प्रजाति को यहां उगाने का सफल प्रयोग किया गया था। अब अनुसंधान केंद्र क्लाइमेट चेंज (मौसम परिवर्तन से होने वाले प्रभावों) पर एक नया प्रयोग करने जा रहा है।
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अधिकारियों का कहना है कि पिछले पांच छह वर्षों से उत्तराखंड के मध्य हिमालय क्षेत्रों में कुछ प्रजातियों में समय से पहली ही पुष्प और फल आ रहे हैं। जिसमें बुरांश, किल्मोड़ा और हिसालू प्रजातियां प्रमुख हैं। प्रयोग के लिए वन क्षेत्र द्वारा हिसालू प्रजाति का चयन किया गया है।
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हिसालू एक झाड़ीनुमा पौधा है, जिसका वानस्पतिक नाम रूबस एलीपटिक्स है जो भूमि संरक्षण के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण प्रजाति है। इसके फल मीठे तथा औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। प्रयोग के लिए कालिका क्षेत्र की तीन चार किमी की एरिया को चयनित किया गया है। यहां प्रचुर मात्रा में हिसालू की पौध उपलब्ध है।