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रानीखेत डोल निवासी आरोपी पर धारा 376 में दोष सिद्ध
Updated Wed, 03 Oct 2018 10:38 PM IST
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अल्मोड़ा। सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने दिव्यांग महिला से बलात्कार के मामले में डोल (सूरी) तहसील रानीखेत निवासी खुशाल सिंह पुत्र भगोत सिंह को धारा 376 में दोषी पाया है। आरोपी को सजा सुनाने के लिए न्यायालय ने आठ अक्तूबर की तिथि निर्धारित की है।
जानकारी के अनुसार दिव्यांग महिला का विवाह 18 साल पहले हुआ। उसका पति शारीरिक रूप से विकलांग है और उनकी कोई संतान नहीं थी। दिव्यांग महिला दिसंबर 2017 में अपने मायके गई, तो उसने मां को बताया कि जब वह ससुराल में जंगल में लकड़ी लेने गई थी तो डोल निवासी खुशाल सिंह ने डरा धमकाकर उसके साथ बलात्कार किया। जिससे पीड़िता गर्भवती हो गई।
पीड़िता के पिता ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी पटवारी सूरी तहसील रानीखेत में दर्ज कराई। बाद में दिव्यांग महिला ने पुत्री को जन्म दिया। इस मामले में आरोपी खुशाल सिंह का डीएनए टेस्ट भी कराया गया, जिसमें उसके जैविक पिता होने की पुष्टि हुई। विवेचनाधिकारी ने आरोपी खुशाल सिंह के विरुद्ध धारा 376 में मुकदमा पंजीकृत किया और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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मामले का विचारण सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में चला। अभियोजन की ओर से सात गवाह न्यायालय में परीक्षित कराए। न्यायालय में आरोपी पर धारा 376 में दोष सिद्ध हुआ। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गिरीश चंद्र फुलारा, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शेखर चंद्र नैल्वाल और विशेष लोक अभियोजक भूपेंद्र कुमार जोशी ने मामले में प्रभावी पैरवी की।
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जानकारी के अनुसार दिव्यांग महिला का विवाह 18 साल पहले हुआ। उसका पति शारीरिक रूप से विकलांग है और उनकी कोई संतान नहीं थी। दिव्यांग महिला दिसंबर 2017 में अपने मायके गई, तो उसने मां को बताया कि जब वह ससुराल में जंगल में लकड़ी लेने गई थी तो डोल निवासी खुशाल सिंह ने डरा धमकाकर उसके साथ बलात्कार किया। जिससे पीड़िता गर्भवती हो गई।
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पीड़िता के पिता ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी पटवारी सूरी तहसील रानीखेत में दर्ज कराई। बाद में दिव्यांग महिला ने पुत्री को जन्म दिया। इस मामले में आरोपी खुशाल सिंह का डीएनए टेस्ट भी कराया गया, जिसमें उसके जैविक पिता होने की पुष्टि हुई। विवेचनाधिकारी ने आरोपी खुशाल सिंह के विरुद्ध धारा 376 में मुकदमा पंजीकृत किया और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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मामले का विचारण सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में चला। अभियोजन की ओर से सात गवाह न्यायालय में परीक्षित कराए। न्यायालय में आरोपी पर धारा 376 में दोष सिद्ध हुआ। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गिरीश चंद्र फुलारा, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शेखर चंद्र नैल्वाल और विशेष लोक अभियोजक भूपेंद्र कुमार जोशी ने मामले में प्रभावी पैरवी की।