{"_id":"5b7ef4ec42c792466f4a1433","slug":"161535046892-almora-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विशेषज्ञों की हरी झंडी के बाद भी टनल का काम शुरू नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विशेषज्ञों की हरी झंडी के बाद भी टनल का काम शुरू नहीं
Updated Thu, 23 Aug 2018 11:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा। डबल इंजन की सरकार बनने के बाद भी विकास कार्यों को गति नहीं मिल पा रही है। विशेषज्ञों की हरी झंडी मिलने के डेढ़ साल बाद भी अल्मोड़ा में 1228 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। यदि यह सुरंग बन जाती तो क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता पर सुरंग बनाने का मामला शासन स्तर पर लटका हुआ है।
जनता की मांग पर 2015 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने टनल निर्माण को स्वीकृति दी। 2016 में कांग्रेस सरकार ने टनल के निर्माण की संभावना की जांच को फिजिविलिटी परीक्षण के आदेश दिए और लोनिवि प्रांतीय खंड को 50 लाख रुपये स्वीकृत किए। इसके बाद विभाग ने टनल निर्माण के फिजिविलिटी परीक्षण का जिम्मा गुड़गांव की कंपनी एमबर्ग इंजीनियरिंग को सौंपा। सर्वे में विशेषज्ञों ने लोअर मालरोड में रोडवेज वर्कशॉप के समीप से सिकुड़ा बैंड (धारानौला) तक टनल निर्माण को फिजिविलिटी परीक्षण में उपयुक्त पाया। इसके बाद कंपनी ने नवंबर 2016 में रिपोर्ट लोनिवि प्रांतीय खंड को सौंपी। लोनिवि ने फिजिविलिटी रिपोर्ट अनुमोदन के लिए दिसंबर 2016 में सरकार को भेजी, लेकिन डेढ़ साल बीतने के बाद भी शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
विज्ञापन
जनता की मांग पर 2015 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने टनल निर्माण को स्वीकृति दी। 2016 में कांग्रेस सरकार ने टनल के निर्माण की संभावना की जांच को फिजिविलिटी परीक्षण के आदेश दिए और लोनिवि प्रांतीय खंड को 50 लाख रुपये स्वीकृत किए। इसके बाद विभाग ने टनल निर्माण के फिजिविलिटी परीक्षण का जिम्मा गुड़गांव की कंपनी एमबर्ग इंजीनियरिंग को सौंपा। सर्वे में विशेषज्ञों ने लोअर मालरोड में रोडवेज वर्कशॉप के समीप से सिकुड़ा बैंड (धारानौला) तक टनल निर्माण को फिजिविलिटी परीक्षण में उपयुक्त पाया। इसके बाद कंपनी ने नवंबर 2016 में रिपोर्ट लोनिवि प्रांतीय खंड को सौंपी। लोनिवि ने फिजिविलिटी रिपोर्ट अनुमोदन के लिए दिसंबर 2016 में सरकार को भेजी, लेकिन डेढ़ साल बीतने के बाद भी शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
विज्ञापन