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वाणिज्य कर विभाग का 120 व्यापारियों को नोटिस
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अल्मोड़ा। वाणिज्य कर विभाग ने गलत आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) रिटर्न भरने पर 120 व्यापारियों को नोटिस जारी कर दिया है। विभाग ने व्यापारियों को 15 दिन का समय देते हुए इसमें सुधार करने को कहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जीएसटी आर रिटर्न में बिक्री नहीं दर्शाने पर आईटीसी का दावा अस्वीकार्य कर दिया जाएगा और व्यापारियों को अपनी जेब से पैसा डालना पड़ेगा।
मालूम हो जिले में 2650 व्यापारी राज्य जीएसटी और 1350 केंद्र जीएसटी के अधीन हैं। पिछले दिनों अधिकारियों ने पंजीकरण की श्रेणी में आने वाले और टर्न ओवर कम दिखाने वाले व्यापारियों पर नजर रखनी शुरू कर दी थी। इसके बाद अधिकारियों ने जिले में सर्वे कर कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बिल बुकों की जांच भी की। इस दौरान गलत आईटीसी रिटर्न भरने पर 120 व्यापारियों को विभाग ने नोटिस थमा दिया है। व्यापारियों को 15 दिन की सहूलियत देते हुए खरीदे जा रहे माल को अपने जीएसटी आर रिटर्न में बिक्री को दर्शाना सुनिश्चित करने को कहा गया है। ऐसा नहीं होने पर आईटीसी का दावा अस्वीकार्य कर दिया जाएगा और व्यापारियों को अपनी जेब से पैसा डालना पड़ेगा।
इधर सहायक आयुक्त राज्य कर कमल किशोर जोशी ने कहा कि व्यापारी अपने सामान की खरीद पर जीएसटी इन (आईडेंटिफिकेशन नंबर) का प्रयोग करना ना भूलें। जो भी व्यापारी अपंजिकृत हैं वे भी कैश में खरीद के स्थान पर बिलों पर अपनी दुकान का पता और पैन नंबर अंकित करा लें। उन्होंने यह भी बताया कि अर्थदंड की कार्रवाई करने की तैयारी लगभग पूरी हो गई है। नियम के तहत कर चोरी करने और कर चोरी में लिप्त पाए जाने वाले व्यापारियों पर दस से 25 हजार रुपये तक अर्थदंड लगाया जाएगा।
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मालूम हो जिले में 2650 व्यापारी राज्य जीएसटी और 1350 केंद्र जीएसटी के अधीन हैं। पिछले दिनों अधिकारियों ने पंजीकरण की श्रेणी में आने वाले और टर्न ओवर कम दिखाने वाले व्यापारियों पर नजर रखनी शुरू कर दी थी। इसके बाद अधिकारियों ने जिले में सर्वे कर कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बिल बुकों की जांच भी की। इस दौरान गलत आईटीसी रिटर्न भरने पर 120 व्यापारियों को विभाग ने नोटिस थमा दिया है। व्यापारियों को 15 दिन की सहूलियत देते हुए खरीदे जा रहे माल को अपने जीएसटी आर रिटर्न में बिक्री को दर्शाना सुनिश्चित करने को कहा गया है। ऐसा नहीं होने पर आईटीसी का दावा अस्वीकार्य कर दिया जाएगा और व्यापारियों को अपनी जेब से पैसा डालना पड़ेगा।
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इधर सहायक आयुक्त राज्य कर कमल किशोर जोशी ने कहा कि व्यापारी अपने सामान की खरीद पर जीएसटी इन (आईडेंटिफिकेशन नंबर) का प्रयोग करना ना भूलें। जो भी व्यापारी अपंजिकृत हैं वे भी कैश में खरीद के स्थान पर बिलों पर अपनी दुकान का पता और पैन नंबर अंकित करा लें। उन्होंने यह भी बताया कि अर्थदंड की कार्रवाई करने की तैयारी लगभग पूरी हो गई है। नियम के तहत कर चोरी करने और कर चोरी में लिप्त पाए जाने वाले व्यापारियों पर दस से 25 हजार रुपये तक अर्थदंड लगाया जाएगा।
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