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सातवें दिन भी कार्य बहिष्कार पर रहे वन रक्षक
Updated Thu, 29 Mar 2018 11:12 PM IST
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अल्मोड़ा। वन आरक्षी वन बीट अधिकारी संघ का वन दरोगा के 33 फीसदी पदों को सीधी भर्ती से भरने का आदेश निरस्त करने सहित दो सूत्री मांगों को लेकर सातवें दिन भी कार्य बहिष्कार जारी रहा। आंदोलित वन रक्षकों ने प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय प्रांगण में धरना दिया और नारेबाजी की। उन्होंने वन दरोगा के सभी पदों को पदोन्नति से भरने की मांग उठाई।
वक्ताओं ने कहा कि एक तरफ सरकार ने वन आरक्षी को 10 वर्ष की सेवा के उपरांत वन दरोगा के पद पर पदोन्नति देने का आदेश जारी किया है ताकि अनुभवी वन आरक्षी पदोन्नत होकर वन दरोगा बन सके, वहीं दूसरी ओर अनुभवहीन व्यक्तियों को सीधे 33 फीसदी वन दरोगा के पदों पर नियुक्ति सरकार देना चाहती है, जो कि तर्कसंगत नहीं है।
उन्होंने कहा कि केंद्र की कर्मचारी सेवा नियमवाली के अनुसार प्रत्येक कर्मचारी को सेवाकाल में अनिवार्य रूप से तीन प्रोन्नति का प्राविधान है। वहीं प्रदेश सरकार का यह आदेश वन आरक्षियों के हितों पर कुठाराघात है। जिसे संगठन बर्दाश्त नहीं करेगा।
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सभा में हरेंद्र सिंह सतवाल, संजय रावत, हीरा सिंह बिष्ट, सावित्री बेगड़ा, चंद्रा आर्या, धीरेंद्र सजवान, गोपाल सिंह, शंकर बिष्ट, भवान सिंह, धीरज वर्मा, कुंदन सिंह बगडवाल, राजेंद्र सिंह बगडवाल, आनंद सिंह परिहार, हेमंत नयाल आदि ने विचार रखे। अध्यक्षता बलवंत भंडारी ने और संचालन खजान मेहता ने किया।
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वक्ताओं ने कहा कि एक तरफ सरकार ने वन आरक्षी को 10 वर्ष की सेवा के उपरांत वन दरोगा के पद पर पदोन्नति देने का आदेश जारी किया है ताकि अनुभवी वन आरक्षी पदोन्नत होकर वन दरोगा बन सके, वहीं दूसरी ओर अनुभवहीन व्यक्तियों को सीधे 33 फीसदी वन दरोगा के पदों पर नियुक्ति सरकार देना चाहती है, जो कि तर्कसंगत नहीं है।
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उन्होंने कहा कि केंद्र की कर्मचारी सेवा नियमवाली के अनुसार प्रत्येक कर्मचारी को सेवाकाल में अनिवार्य रूप से तीन प्रोन्नति का प्राविधान है। वहीं प्रदेश सरकार का यह आदेश वन आरक्षियों के हितों पर कुठाराघात है। जिसे संगठन बर्दाश्त नहीं करेगा।
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सभा में हरेंद्र सिंह सतवाल, संजय रावत, हीरा सिंह बिष्ट, सावित्री बेगड़ा, चंद्रा आर्या, धीरेंद्र सजवान, गोपाल सिंह, शंकर बिष्ट, भवान सिंह, धीरज वर्मा, कुंदन सिंह बगडवाल, राजेंद्र सिंह बगडवाल, आनंद सिंह परिहार, हेमंत नयाल आदि ने विचार रखे। अध्यक्षता बलवंत भंडारी ने और संचालन खजान मेहता ने किया।